– 20 मंत्रियों और 100 से अधिक विधायकों ने सोशल मीडिया पर पुराने समाचार और तस्वीरें साझा कर हमला बोला
लखनऊ। मुजफ्फरनगर दंगों के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी के खिलाफ एक बार फिर राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के मंत्रियों और विधायकों ने सोशल मीडिया के जरिए तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए पुराने समाचारों की कतरनें और दंगों से जुड़ी तस्वीरें साझा की हैं।
भाजपा की ओर से चलाए गए इस अभियान में करीब 20 मंत्रियों और 100 से अधिक विधायकों के शामिल होने की बात सामने आई है। पोस्ट के जरिए भाजपा नेताओं ने मुजफ्फरनगर हिंसा के दौरान तत्कालीन सरकार की भूमिका और कानून-व्यवस्था पर हमला बोला है ।
प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह, जयवीर सिंह और असीम अरुण समेत कई भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर मुजफ्फरनगर दंगों से संबंधित पुरानी खबरों और तस्वीरों को साझा किया। भाजपा नेताओं ने इन पोस्ट के जरिए सपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए तत्कालीन सरकार के कार्यकाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल दागे ।
मंत्रियों के साथ भाजपा के 100 से अधिक विधायकों द्वारा भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है। इससे साफ है कि पार्टी ने मुजफ्फरनगर दंगों के मुद्दे को एक संगठित राजनीतिक अभियान के तौर पर उठाया है।
भाजपा नेताओं का फोकस तत्कालीन सपा सरकार के कार्यकाल में हुई हिंसा और उसके बाद की राजनीतिक परिस्थितियों पर है। पोस्ट और पुरानी खबरों के जरिए भाजपा जनता के बीच उस दौर की कानून-व्यवस्था का मुद्दा फिर से उठाने की कोशिश कर रही है।
मुजफ्फरनगर दंगों का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील और प्रभावशाली मुद्दा रहा है। भाजपा के इस नए अभियान से एक बार फिर सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के संकेत हैं।
भाजपा नेताओं के सोशल मीडिया अभियान का निशाना सीधे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं। पार्टी नेताओं की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि तत्कालीन सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए गए और हिंसा से निपटने में सरकार की भूमिका कैसी रही।


