Uttar Pradesh में भाजपा संगठन के भीतर बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary लगातार पार्टी हाईकमान के साथ बैठकों में जुटे हैं और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संगठन को नया रंग और नई दिशा देने की बड़ी तैयारी चल रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार संगठनात्मक फेरबदल का केंद्र केवल चेहरे बदलना नहीं बल्कि बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सम्मान और भागीदारी देना होगा।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली से लेकर लखनऊ तक भाजपा में कई दौर की रणनीतिक बैठकों का सिलसिला जारी है। पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को और अधिक आक्रामक, सक्रिय और कार्यकर्ता आधारित बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। बताया जा रहा है कि प्रदेश संगठन में करीब 40 से 50 प्रतिशत तक नए चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी भी तय मानी जा रही है।
भाजपा के अंदरूनी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में पार्टी के लगभग 1.80 करोड़ सक्रिय सदस्य और 1.60 लाख से अधिक बूथ इकाइयां संगठन की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती हैं। यही वजह है कि पंकज चौधरी लगातार “कार्यकर्ता सर्वोपरि” का संदेश देने में जुटे दिखाई दे रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संगठन में वही चेहरा आगे बढ़ेगा जो जमीन पर सक्रिय और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ रखता हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंकज चौधरी की कार्यशैली का सबसे बड़ा पहलू उनका संतुलित और शांत संगठनात्मक दृष्टिकोण है। वह जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के साथ-साथ पुराने कार्यकर्ताओं के सम्मान को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। माना जा रहा है कि आगामी संगठन विस्तार में पिछड़ा वर्ग, दलित और युवा चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
भाजपा के भीतर यह संदेश भी तेजी से फैलाया जा रहा है कि संगठन केवल नेताओं का मंच नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं की मेहनत से खड़ा विशाल परिवार है। यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष लगातार जिलों से फीडबैक ले रहे हैं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यदि पंकज चौधरी संगठन में कार्यकर्ताओं के सम्मान और भागीदारी का संतुलन बनाने में सफल रहते हैं तो यह भाजपा के लिए आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक लाभ साबित हो सकता है। फिलहाल यूपी भाजपा में बदलाव की आंधी चलने के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं और सबकी नजर अब प्रदेश संगठन की नई सूची पर टिक गई है।


