– 7 लाख से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कर प्रदेश में बना नंबर-1
आजमगढ़। प्रशासनिक इच्छाशक्ति, जमीनी मेहनत और दूरदर्शी नेतृत्व जब एक साथ खड़े होते हैं तो इतिहास बनता है। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ ने यही कर दिखाया है। जिले में 7 लाख से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कर आजमगढ़ पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। इस बड़ी उपलब्धि के पीछे जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की संयुक्त मेहनत के साथ जिलाधिकारी रविंद्र कुमार का प्रेरणादायी नेतृत्व सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
अपने शांत स्वभाव, अनुशासित कार्यशैली और जनहित के प्रति समर्पण के लिए पहचाने जाने वाले जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ऊंचाइयों को छूने वाले लोग केवल पर्वतों पर नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में भी नए कीर्तिमान स्थापित करते हैं। स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एंबेसडर रह चुके रविंद्र कुमार दो बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराकर विजय पताका लहरा चुके हैं। अब वही जुझारूपन और दृढ़ इच्छाशक्ति आजमगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था में भी दिखाई दे रही है।
फार्मर रजिस्ट्री अभियान को लेकर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने जिस तरह गांव-गांव रणनीति तैयार की, उसने प्रशासनिक मशीनरी में नई ऊर्जा भर दी। तहसील, ब्लॉक और ग्राम स्तर तक अधिकारियों और कर्मचारियों को सक्रिय करते हुए अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया गया। राजस्व विभाग की टीमों ने गांवों में कैंप लगाकर किसानों का पंजीकरण कराया। परिणाम यह रहा कि आजमगढ़ प्रदेश में सबसे अधिक फार्मर रजिस्ट्री करने वाला जिला बन गया।
प्रशासन का कहना है कि फार्मर रजिस्ट्री से किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा और कृषि संबंधी सुविधाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने स्वयं अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र किसान पंजीकरण से वंचित न रहे। यही वजह रही कि अभियान ने रिकॉर्ड सफलता हासिल की।
आजमगढ़ के ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक टीमों की सक्रियता चर्चा का विषय बनी रही। कई गांवों में सुबह से देर शाम तक कैंप लगाकर किसानों को जागरूक किया गया। प्रशासन की अपील पर बड़ी संख्या में किसानों ने भी उत्साह दिखाया। अब जिला प्रशासन बच गए किसानों से भी जल्द फार्मर रजिस्ट्री कराने की अपील कर रहा है।
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की पहचान केवल एक प्रशासनिक अधिकारी की नहीं बल्कि प्रेरणा, संघर्ष और अनुशासन के प्रतीक के रूप में भी होती है। एवरेस्ट की बर्फीली चोटियों पर तिरंगा फहराने वाले इस अधिकारी ने आजमगढ़ में विकास और प्रशासनिक दक्षता का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। प्रशासनिक गलियारों में कहा जा रहा है कि जिस अधिकारी ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को दो बार जीत लिया हो, उसके लिए जनसेवा की चुनौतियां भी एक मिशन बन जाती हैं।
आजमगढ़ की यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की सफलता नहीं बल्कि उस भरोसे की जीत है जिसमें प्रशासन और जनता ने मिलकर विकास का नया अध्याय लिखा है।


