डॉ विजय गर्ग
पवन ऊर्जा आज स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी है। यह जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन इसके साथ एक चुनौती भी जुड़ी है—तेज़ी से घूमने वाले पवन टरबाइनों के ब्लेडों से टकराकर हर वर्ष बड़ी संख्या में पक्षियों की मृत्यु हो जाती है। वैज्ञानिक लंबे समय से इस समस्या का ऐसा समाधान खोज रहे थे, जिससे ऊर्जा उत्पादन भी प्रभावित न हो और पक्षियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
इसी दिशा में किए गए एक अध्ययन ने बेहद सरल लेकिन प्रभावी उपाय प्रस्तुत किया। वैज्ञानिकों ने पवन टरबाइन के तीन ब्लेडों में से केवल एक ब्लेड को काले रंग से रंग दिया। इस छोटे-से बदलाव से घूमते हुए ब्लेड और आकाश के बीच स्पष्ट रंग-विरोध (कॉन्ट्रास्ट) बन गया, जिससे पक्षियों के लिए टरबाइन को पहचानना आसान हो गया। अध्ययन में पाया गया कि इस उपाय से परीक्षण किए गए टरबाइन पर पक्षियों की टक्करों में लगभग 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
वैज्ञानिकों का मानना है कि सामान्य रंग के ब्लेड तेज़ गति से घूमने के कारण पक्षियों को स्पष्ट दिखाई नहीं देते। काले रंग का एक ब्लेड घूमते समय एक अलग दृश्य संकेत उत्पन्न करता है, जिससे पक्षी समय रहते दिशा बदल सकते हैं और टकराव से बच सकते हैं।
इस उपाय की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और कम लागत है। इसके लिए टरबाइन की संरचना बदलने या महंगे उपकरण लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। केवल एक ब्लेड को काले रंग से रंगकर पक्षियों की सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
हालाँकि वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह हर स्थान पर समान रूप से प्रभावी हो, यह आवश्यक नहीं है। विभिन्न पक्षी प्रजातियों, मौसम, भौगोलिक परिस्थितियों और टरबाइन के प्रकार के अनुसार इसके परिणाम बदल सकते हैं। इसलिए इस तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाने से पहले अलग-अलग क्षेत्रों में और अधिक शोध की आवश्यकता है।
पवन ऊर्जा का विस्तार पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है, लेकिन इसके साथ जैव विविधता की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसी कारण वैज्ञानिक अन्य उपायों पर भी काम कर रहे हैं, जैसे रडार आधारित निगरानी प्रणाली, प्रवासी पक्षियों के मौसम में अस्थायी रूप से टरबाइन बंद करना और पवन ऊर्जा परियोजनाओं का सावधानीपूर्वक चयनित स्थानों पर निर्माण।
यह अध्ययन हमें एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि बड़े पर्यावरणीय समाधान हमेशा जटिल या महंगे नहीं होते। कभी-कभी एक छोटा-सा बदलाव भी आश्चर्यजनक परिणाम दे सकता है। एक काले रंग का टरबाइन ब्लेड इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि विज्ञान, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण मिलकर स्वच्छ ऊर्जा तथा वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित कर सकते हैं।
स्वच्छ ऊर्जा का भविष्य तभी सफल होगा जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर आगे बढ़े। एक काले ब्लेड का यह सरल प्रयोग हमें सिखाता है कि छोटी-सी वैज्ञानिक सोच भी हजारों पक्षियों का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब


