मालदीव-लक्षद्वीप क्यों? यूपी भी घूमने के लिए परफेक्ट:विदेशों से भी खूबसूरत है प्रदेश का इकलौता बीच, सुकून की चाह है तो कृष्ण नगरी बेस्ट

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यूथ इंडिया, लखनऊ। इन दिनों मालदीव और लक्षद्वीप बड़ी चर्चा में हैं। लक्षद्वीप इसलिए, क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी यहां गए और टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए लोगों से यहां आने की अपील कर गए। मालदीव इसलिए, क्योंकि वहां के तीन मंत्रियों ने पीएम पर अभद्र टिप्पणी की और कहा- लक्षद्वीप मालदीव जैसा नहीं है। इसके बाद विवाद हो गया। मालदीव सरकार बैकफुट पर आ गई। उन मंत्रियों को सस्पेंड कर दिया। भारत में बायकॉट मालदीव ट्रेंड हो गया। हजारों लोगों ने मालदीव जाने का प्लान कैंसिल कर दिया।

अब आपकी बात। आपने घूमने का मन बनाया है। मालदीव का सोचा नहीं था। लक्षद्वीप दूर लगता है। ऐसे में मन में आता है कि क्या यूपी में ऐसी जगह हैं, जो लक्षद्वीप जैसा फील करवाए। इतना अलग हो कि मन को शांति मिले। सुकून मिले। इसका जवाब है- हां। आज हम यूपी के उन 7 चुनिंदा जगहों को जानने वाले हैं, जो घूमने के लिए परफेक्ट जगह हैं। आइए सब कुछ एक तरफ से जानते हैं…

पीलीभीतः प्रदेश का इकलौता बीच जो विदेशों से भी शानदार
राजधानी लखनऊ से लगभग 263 किलोमीटर दूर पीलीभीत में प्रदेश का इकलौता मानव निर्मित बीच है। शारदा सागर बांध पर बना यह बीच 17 किलोमीटर लंबा है। 2002 से पहले यह जंगल हुआ करता था। उसके बाद यहां IFS अधिकारी रमेश पांडेय तैनात किए गए। उन्होंने Save Tiger Project के जरिए इस जगह को ईको टूरिज्म स्पॉट की तरह डेवलप करवाया। 2004 में उनका ट्रांसफर हुआ, तो वन विभाग ने इस जगह को वाइल्ड सफारी और टूरिस्ट स्पॉट की तरह री-डेवलप करवाया। 9 जून 2014 को चूका बीच को औपचारिक रूप से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया।

अब यह पूरा इलाका बदल गया है। यहां की हॉस्पिटैलिटी वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए टेंपरेरी तौर पर लग्जरी कमरे बनाए गए हैं। इनमें 1 ट्री-हाउस, 4 थारू हट्स, 1 बैंबू वाटर हट शामिल है। ट्री-हाउस की ऊंचाई करीब 60 फुट है। यहां से कई बार लोगों ने बाघ देखे हैं। एडवेंचर के लिहाज से चूका में काफी चीजें एक्सप्लोर की जा रही। यहां आपको 127 तरह के जंगली जानवर, 556 तरह के पक्षी और लगभग 2000 किस्म के फूल-पौधे देखने को मिल जाएंगे।

यहां रुकने के लिए आपको प्री-बुकिंग करवानी होगी। इसके लिए upecotourism.in पर जाना होगा। ऑफलाइन बुकिंग की कोई सुविधा नहीं है। यहां ठहरने का किराया 5 हजार से 7 हजार के बीच है। जिप्सी शेयरिंग करके घूमने पर प्रति व्यक्ति चार्ज 500 रुपए है। बोटिंग के लिए 650 रुपए अलग से लगते हैं। कुल मिलाकर चूका टूरिस्ट स्पॉट पर्यटकों के लिए यादगार जगह है। यहां की खूबसूरती विदेशी बीचों को भी टक्कर देती है।

वाराणसीः दुनिया की सबसे पुरानी नगरी घूमने का अलग सुख
भगवान विश्वनाथ की नगरी के रूप में प्रसिद्ध काशी में घूमने के लिए करीब 10 से ज्यादा जगह हैं। इसमें यहां के घाट और गंगा के बीच बोटिंग सबसे ज्यादा चर्चित है। नया बना बाबा विश्वनाथ मंदिर यहां पहुंचे पर्यटकों को अध्यात्मिक सुकून देता है। इसके अतिरिक्त यहां संकट मोचन हनुमान मंदिर, तुलसी मनसा मंदिर, नेपाली मंदिर, बटुक भैरव मंदिर हैं जहां हमेशा पर्यटकों की भीड़ लगी होती है। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती पूरी दुनिया में मशहूर है।

गंगा आरती को देखने के लिए हर दिन हजारों लोग यहां पहुंचते हैं।

गंगा आरती को देखने के लिए हर दिन हजारों लोग यहां पहुंचते हैं।

काशी अपनी संकरी गलियों के लिए मशहूर है। यहां की गलियां दुकानों से भरी हैं। वो चाहे खाने की हो या फिर पीतल की मूर्तियों व बनारसी साड़ी की हो। यहां हाथ से बनने वाली साड़ी आपको विशेष पसंद आएगी। खाने में यहां चाट, जलेबी, लिट्टी-चोखा विशेष मशहूर है। अगर आप पान खाने के शौकीन हैं तो फिर यहां आपको मन पसंद पान मिलेगा। परिवार सहित जाने की सोचते हैं तो 3 दिन का टूर 15-20 हजार में पूरा हो जाएगा।

लखनऊः मुस्कुराइए, आप नवाबों और कवाबों के शहर में हैं
“मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं।” राजधानी की यह टैगलाइन जहां भी दिखती है आदमी मुस्कुरा ही देता है। गोमती नदी के किनारे बसा यह शहर घूमने और खाने के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां घूमने के लिए इमामबाड़ा, चिड़ियाघर, अम्बेडकर मेमोरियल पार्क, दिलकुशा कोठी, फिरंगी महल, क्लॉक टॉवर, चंद्रिका देवी मंदिर, टीले वाली मस्जिद जैसी तमाम जगहें हैं। मुंबई की तरह यहां भी गोमती नगर से सटी एक सड़क का नाम मरीन ड्राइव रखा गया है। यह लखनऊ में खासा लोकप्रिय है।

गोमती रिवर फ्रंट पर्यटकों को सबसे ज्यादा रोमांचित करता है।

गोमती रिवर फ्रंट पर्यटकों को सबसे ज्यादा रोमांचित करता है।

इन सबके इतर लखनऊ अपने खाने के लिए मशहूर है। पुराने लखनऊ शहर की हलचल के बीच कबाब और बिरियानी के आउटलेट अपनी खुशबू से आपको बांधते हैं। लखनवी चिकन बाजार अपनी कारीगरी से यहां किसी को भी मोह लेता है। इसलिए जब भी आप घूमने के लिए लखनऊ चुने, कम से कम 3 दिन का वक्त लें। क्योंकि यहां एक-दो दिन में आप पूरा घूम ही नहीं सकते।

मथुराः सुकून और शांति की चाह है तो कृष्ण नगरी सबसे बेस्ट
आप अपने काम के चलते परेशान हो गए। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ रहा। स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया। ऐसे में ऐसी जगह की तलाश है जो मन को स्थिर करे। सुकून महसूस हो। इसके लिए मथुरा सबसे परफेक्ट जगह है। यह जगह विष्णु के 8वें अवतार भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली के लिए प्रसिद्ध है इसलिए यहां के सारे मंदिरों में भगवान कृष्ण की दिखते हैं। कृष्ण जन्मभूमि मंदिर, प्रेम मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, राधा कुंड, गोवर्धन पर्वत, कुसुम सरोवर, रंगाजी मंदिर यहां घूमने के लिए परफेक्ट है।

वृंदावन के प्रेम मंदिर की खूबसूरती की तुलना अक्सर ताजमहल से की जाती है।

वृंदावन के प्रेम मंदिर की खूबसूरती की तुलना अक्सर ताजमहल से की जाती है।

मथुरा से थोड़ी ही दूर बरसाना और वृंदावन है। घूमने के लिए यह भी अच्छी जगह है। खाने के मामले में यहां तो वैसे सब कुछ मिलता है लेकिन यहां का खास पेड़ा पूरी दुनिया में मशहूर है। होटल की कीमत भी यहां बाकी जगहों से कम रेट पर है। कुल मिलाकर अगर आप परिवार के साथ 3-4 दिन का टूर प्लान करते हैं तो 25-30 हजार रुपए के खर्च में पूरा हो जाएगा। अक्टूबर महीने से मार्च महीने तक यहां आना सबसे परफेक्ट है।

प्रयागराज : तीन नदियों का संगम देखने दुनिया खिंची चली आती है
मन में पवित्र शहरों का नाम आते ही प्रयागराज का नाम सबसे पहले आ जाता है। गंगा-यमुना और सरस्वती नदी का संगम यहीं है। इसे देखने न सिर्फ देश से बल्कि विदेश से हर साल हजारों की संख्या में लोग आते हैं। अगर आप घूमने के लिए प्रयागराज को चुन रहे हैं तो दिसंबर से फरवरी तक का महीना बेस्ट हो सकता है। क्योंकि यहां 14 जनवरी से करीब 10 मार्च तक दुनिया का सबसे बड़ा मेला लगता है। इस दौरान 10 करोड़ से ज्यादा लोग यहां संगम में स्नान करने और घूमने आते हैं।

प्रयागराज में साइबेरिया से आए ये पक्षी संगम की खूबसूरती को दोगुना कर देते हैं।

प्रयागराज में साइबेरिया से आए ये पक्षी संगम की खूबसूरती को दोगुना कर देते हैं।

प्रयागराज में घूमने के लिए खुशरो बाग, अकबर का किला, आनंद भवन, तारामंडल, नैनी ब्रिज, कंपनी गार्डेन, मनकामेश्वर मंदिर, नागवासुकी मंदिर हनुमान मंदिर, फन गांव वॉटर पार्क जैसी प्रसिद्ध जगहें हैं। खाने के लिए यहां हर इलाके में प्रसिद्ध दुकानें हैं। देहाती रसगुल्ला, जायसवाल डोसा, नेतराम की कचौड़ी यहां खासा प्रसिद्ध है। होटल के रेट भी बाकी पर्यटन स्थलों से सस्ते हैं। लोकल गाड़ियां आसानी से उपलब्ध हैं। 2 दिन में आप पूरा शहर घूम सकते हैं।

अयोध्याः राम मंदिर के बाद पर्यटन का मुख्य केंद्र बनेगी अवधनगरी
अयोध्या जी..यूपी का एक ऐसा जिला, जिसका नाम लेते वक्त अक्सर लोग जी लगाते हैं। अयोध्या कभी पर्यटन का मुख्य केंद्र नहीं रहा। लेकिन अब राम मंदिर निर्माण के बाद सबसे ज्यादा लोगों की पसंद में शामिल हो गया है। 22 जनवरी यानी प्रभु राम की प्राण-प्रतिष्ठा होने तक यहां जाना ठीक नहीं है लेकिन इसके बाद आप घूमने के लिए इस जगह जरूर जाएं। सरयू नदी के किनारे बसी रामनगरी अब पूरी तरह से बदल गई है।

राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या पर्यटन का प्रमुख केंद्र होगा।

राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या पर्यटन का प्रमुख केंद्र होगा।

अयोध्या में अब सड़कें चौड़ी हो गई। एयरपोर्ट शुरू हो गए। हर तरफ भगवान राम की मूर्ति या फिर उनकी पेंटिंग से पूरे शहर को चमका दिया गया है। यहां आपको खाने में शाकाहारी भोजन ही मिलेगा लेकिन स्वाद लाजवाब होगा। यहां घूमने के लिए रामकोट, कनक भवन, हनुमान गढ़ी, मणि पर्वत, सरयू नदी, तुलसी स्मारक भवन और सीता की रसोई अच्छी जगह है। अयोध्या की कनेक्टिविटी अब हर जिलों से जोड़ दी गई है। इसलिए आपको वहां पहुंचने में दिक्कत नहीं होगी।

आगराः ताज के एक दीदार के लिए हर साल 40 लाख लोग आ रहे
दुनिया के 7 अजूबों में एक अजूबा आगरा का ताजमहल भी है। करीब 400 साल पहले सफेद संगमरमर से बनी यह इमारत आज भी दूर से ही चमकता हुआ दिखता है। प्रेम की इस निशानी को देखने यहां अक्सर नव दंपतियों की संख्या अधिक नजर आती है। हर साल 40 लाख से ज्यादा पर्यटक यहां ताज का दीदार करने आते हैं। इसमें विदेशी सैलानियों की संख्या लाखों में होती है।

भारत आने वाले हर विदेशी सैलानी की पहली पसंद ताजमहल का दीदार करना होता है।

भारत आने वाले हर विदेशी सैलानी की पहली पसंद ताजमहल का दीदार करना होता है।

अगर आप आगरा आते हैं और वन्य जीव प्रेमी हैं तो आपके लिए करीब 1 घंटे की दूरी पर कुछ लुप्त हो चुकी प्रजातियों का घर है। इसमें घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए, गंगा डॉल्फिन, भारतीय स्कीमर शामिल हैं। इन दोनों जगहों के अलावा आप फतेहपुर सीकरी जा सकते हैं। लाल बलुआ पत्थर से बना यह शहर शानदार है। यह सब आप सुबह से लेकर शाम तक में देख सकते हैं। यहां से वापसी पर आप यहां के मशहूर पेठे का स्वाद जरूर चख सकते हैं।

चित्रकूटः पहाड़ों का इलाका, अजूबे हैरान कर देंगे
राजनीतिक और आर्थिक रूप से चित्रकूट जरूर थोड़ा पीछे दिखता है लेकिन अध्यात्म और पर्यटन के मामले में यह जिला बाकियों से आगे है। यहां कामतानाथ भगवान मंदिर की परिक्रमा करने के लिए लाखों लोग जाते हैं। इस मंदिर से करीब 5 किमी दूर हनुमान धारा है। आपको 360 सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाना होगा। वहां जाएंगे तो देखेंगे कि इतनी ऊंचाई पर भी पानी की एक धारा लगातार बहती रहती है।

चित्रकूट से करीब 40 किमी दूर पहाड़ों पर बसी हनुमान धारा यहां सबसे ज्यादा रोमांचित करती है।

चित्रकूट से करीब 40 किमी दूर पहाड़ों पर बसी हनुमान धारा यहां सबसे ज्यादा रोमांचित करती है।

इसके अतिरिक्त राम-भरत का मिलाप यहीं हुआ था। वहां भी आप जा सकते हैं। गुप्त गोदावरी गुफा, रामघाट, लक्ष्मण पहाड़ी, कामदगिरि पर्वत, जल प्रपात, सती अनुसुइया जैसी जगह है। तीन दिन का प्लान करके अगर आप जाते हैं तो यहां आराम से घूम सकते हैं। खाने और रहने का बजट भी यहां कम होगा। इसलिए अगर 20 हजार रुपए जेब में है तो कोई दिक्कत नहीं होगी।

इन 8 जगहों के अतिरिक्त भी यूपी में घूमने के लिए कई स्थान हैं। मिर्जापुर का विंध्याचल, श्रावस्ती का बौद्ध स्तूप, कानपुर का पक्षी बिहार और वॉटर पार्क, हापुड़ का गढ़मुक्तेश्वर, फिरोजाबाद की चूड़ी मार्केट प्रमुख है। कुल मिलाकर हर जिला किसी ने किसी खास वजह से पर्यटकों को लुभाता है। एडवेंचर के लिए सोनभद्र के पहाड़ भी खास हैं। चुनना आपको है कि कौन सी जगह आपके लिए परफेक्ट होगी।

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