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Thursday, April 30, 2026

हादसों का हॉटस्पॉट बना अमृतपुर मार्ग: एक माह में दर्जनभर दुर्घटनाएं, सुरक्षा इंतजाम नाकाफी

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अमृतपुर फर्रुखाबाद

कस्बा अमृतपुर में मुख्य बस अड्डे से करीब एक किलोमीटर तक का सड़क क्षेत्र इन दिनों लगातार हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। आए दिन हो रही दुर्घटनाओं से स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है, लेकिन इसके बावजूद अभी तक ठोस और प्रभावी सुरक्षा इंतजाम नहीं हो सके हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ दिन पूर्व इसी मार्ग पर बाइक और ट्रैक्टर की आमने-सामने टक्कर में दो युवकों की मौत हो गई थी। इसके बाद भी हादसों का सिलसिला नहीं थमा और तीन से चार अन्य दुर्घटनाएं सामने आईं। हाल ही में हनुमान प्रतिमा के पास हुए हादसे में एक युवक की मौके पर ही जान चली गई, जबकि बीते दिन बाइक और कार की भिड़ंत में कई लोग घायल हुए। अधिकांश मामलों में तेज रफ्तार और लापरवाही को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद क्षेत्रीय लोगों ने संकेतक बोर्ड, स्पीड ब्रेकर और अन्य सुरक्षा उपायों की मांग उठाई। प्रशासन की ओर से बस अड्डे के पास टेबल ब्रेकर तो बनवाया गया, लेकिन इससे भी हादसों में अपेक्षित कमी नहीं आई।
इसी क्रम में गुरुवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से सड़क सुरक्षा को लेकर कुछ कदम उठाए गए। विभागीय सुपरवाइजर नितिन की मौजूदगी में सड़क पर सफेद पट्टी (रोड मार्किंग) का कार्य कराया गया। यह कार्य बस अड्डे से लेकर बासी अड्डा तक करीब छह प्रमुख स्थानों—बस अड्डा ब्रेकर के पास, बाजार वाली गली के सामने, हुसैनपुर मोड़ और बासी अड्डा सहित—पर किया गया है।
ग्रामीण लोकतंत्र सेनानी हरि शरण सिंह राठौर ने बताया कि बीते एक महीने में इस मार्ग पर करीब 10 से 12 सड़क हादसे हो चुके हैं, लेकिन अभी तक पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने जल्द ही चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर, स्पीड कंट्रोल उपाय और ट्रैफिक व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग की है।
वहीं PWD सुपरवाइजर नितिन ने बताया कि फिलहाल सड़क मार्किंग का कार्य कराया गया है और विभाग से आगे जो निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में विभागीय जेई वीर बहादुर ने बताया कि सुरक्षा उपायों को लेकर प्रस्ताव प्रशासन को भेजा जा चुका है और स्वीकृति मिलते ही आगे का कार्य शुरू कराया जाएगा।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक अमृतपुर की यह सड़क यूं ही हादसों का गवाह बनती रहेगी और कब तक लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे।

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