समिति परिवार में आकस्मिक निधन के चलते निर्धारित तिथि से पहले सातवें दिन किया गया विसर्जन, पुलिस रही मुस्तैद
अमृतपुर
कस्बा अमृतपुर में श्री सिद्धि विनायक समिति की ओर से स्थापित भगवान श्री गणेश की प्रतिमा का श्रद्धा और शोक के बीच सातवें दिन विसर्जन किया गया। समिति द्वारा 14 सितंबर को बड़े हनुमान जी की मूर्ति के पास विधि-विधान से गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई थी। स्थापना के बाद से ही क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ था और श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना कर रहे थे।समिति की ओर से प्रतिमा का विसर्जन 25 सितंबर को निर्धारित किया गया था, लेकिन इसी बीच समिति परिवार के एक सदस्य के आकस्मिक निधन से माहौल शोकाकुल हो गया। इसके चलते समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने निर्धारित तिथि से पहले ही प्रतिमा विसर्जन करने का निर्णय लिया।गणेश स्थापना के सातवें दिन समिति के सदस्यों ने प्रतिमा को ट्रैक्टर पर विराजमान कर श्रद्धालुओं के साथ बलीपट्टी रानीगांव स्थित मां भगवती गंगा घाट के लिए प्रस्थान किया। घाट पर जेसीबी की सहायता से गड्ढा तैयार कराया गया, जिसके बाद श्रद्धा और विधि-विधान के साथ प्रतिमा का विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नम आंखों से भगवान गणेश को विदाई दी तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
विसर्जन कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अमृतपुर थाना अध्यक्ष दर्शन सोलंकी पुलिस बल के साथ यात्रा में मौजूद रहे। पुलिस टीम ने पूरे मार्ग पर सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था बनाए रखी। पुलिस की मौजूदगी में विसर्जन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।इसके अलावा अमृतपुर क्षेत्र के हरसिंहपुर गहलवार तथा अमृतपुर में दो अन्य स्थानों पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं का भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत विसर्जन कराया गया। पुलिस प्रशासन ने सभी स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती।विसर्जन कार्यक्रम में श्री सिद्धि विनायक समिति के पदाधिकारी पंडित देवव्रत अग्निहोत्री, अभिषेक राठौर, निशांत अवस्थी, पवन मिश्रा, अर्पित सिंह, शोभित सिंह, अनिकेत सिंह, सूर्यांश सिंह, अरुण कुमार सिंह, प्रखर अग्निहोत्री, चंदन शुक्ला, अनिल चौहान, मोने चौहान, आयुष सिंह, लखन पाठक सहित समिति के अन्य सदस्य एवं श्रद्धालु मौजूद रहे।समिति सदस्यों ने बताया कि आकस्मिक निधन के कारण वातावरण शोकपूर्ण हो गया था। इसी को देखते हुए निर्धारित तिथि से पहले सातवें दिन ही भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करने का निर्णय लिया गया।


