कमीशन दो, तभी होगी तौल’ के आरोपों से मचा हड़कंप, बिचौलियों की भूमिका पर भी उठे सवाल, किसानों में भारी आक्रोश
अमृतपुर/फर्रुखाबाद।
राजेपुर स्थित मक्का क्रय केंद्र एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। किसानों ने क्रय केंद्र पर कथित अनियमितता, बिचौलियों की सक्रियता और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाते हुए जिला अधिकारी डॉ. अंकुल लाठर से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित क्रय केंद्र प्रभारी और दोषी कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।किसानों का आरोप है कि समर्थन मूल्य पर मक्का बेचने के लिए कई दिनों तक क्रय केंद्र के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आरोप यह भी है कि बिना कथित “कमीशन” दिए मक्का की तौल नहीं की जाती, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसानों का समय, श्रम और धन तीनों बर्बाद हो रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे खरीद की व्यवस्था का दावा करती है, लेकिन राजेपुर मक्का क्रय केंद्र पर हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ कथित दलाल खरीद प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।किसानों ने जिला अधिकारी डॉ. अंकुल लाठर से मांग की है कि क्रय केंद्र के अभिलेखों, तौल रजिस्टर, टोकन व्यवस्था, सीसीटीवी फुटेज और खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी प्रकार की अवैध वसूली, लापरवाही या भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है तो संबंधित क्रय केंद्र प्रभारी एवं जिम्मेदार कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी किसानों का शोषण करने का साहस न कर सके।किसानों का कहना है कि अन्नदाता अपनी मेहनत की फसल लेकर सरकारी केंद्र पर सम्मान और उचित मूल्य की उम्मीद से आता है। यदि वहीं उसका शोषण होगा तो सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
हालांकि, समाचार में लगाए गए आरोप किसानों एवं स्थानीय सूत्रों द्वारा लगाए गए आरोप हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग एवं क्रय केंद्र प्रभारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


