लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रशासनिक और विभागीय जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के 18 अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। प्राधिकरण ने संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं की भूमिका को लेकर शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है।
सूत्रों के अनुसार जांच में यह तथ्य सामने आया है कि जिस भवन में हादसा हुआ, उसके खिलाफ पूर्व में ध्वस्तीकरण और अन्य कार्रवाई के आदेश जारी किए गए थे। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी और भवन का संचालन जारी रहा। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है।
रिपोर्ट में पांच जोनल अधिकारियों और छह सहायक अभियंताओं के नाम शामिल किए गए हैं। इसके अलावा छह अवर अभियंताओं (JE) की भी जवाबदेही निर्धारित की गई है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने अपने कार्यक्षेत्र में भवन संबंधी नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित नहीं किया और समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
जांच के दौरान यह भी देखा गया कि भवन के विरुद्ध पूर्व में जारी आदेशों का क्रियान्वयन क्यों नहीं हुआ तथा किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। प्राधिकरण का मानना है कि यदि समय पर नियमानुसार कार्रवाई की गई होती तो स्थिति अलग हो सकती थी।
अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रदेश सरकार अवैध निर्माणों, कोचिंग संस्थानों और बहुमंजिला भवनों की जांच को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। इसी क्रम में केवल भवन स्वामियों ही नहीं, बल्कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अब शासन स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण किया जाएगा, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। इस घटनाक्रम ने विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


