लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक के बाद एक तीखे बयान देकर सरकार और व्यवस्था पर सीधा हमला बोला। उन्होंने पीड़ित परिवारों को न्याय, कथित फर्जी मुकदमों की वापसी और प्रशासनिक नियुक्तियों में पारदर्शिता पर बड़े सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि उनका डेलिगेशन पीड़ित परिवार से मिला और 5 लाख रुपये की मदद भी दी, लेकिन “न्याय अभी भी अधूरा है”। उन्होंने मांग रखी कि परिवार को न्याय मिले और सपा कार्यकर्ताओं पर दर्ज “झूठे मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं”।
उन्होंने प्रतापगढ़ और फतेहपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए—“दलित बेटियों के साथ हुए हादसों में आरोपी सत्ता से जुड़े हैं और उन्हें बचाया जा रहा है”। इस बयान ने कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संरक्षण पर नई बहस छेड़ दी है।
चुनाव आयोग और प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर भी उन्होंने तीखा सवाल उठाया—“क्या बिना पारिवारिक संबंध के आगरा-नोएडा जैसी पोस्टिंग मिल जाती है? क्या रिश्ते नहीं होंगे तो कोई डीजीपी बन जाएगा?”। इस टिप्पणी से नौकरशाही में कथित पक्षपात और पारिवारिक नेटवर्किंग पर सवाल खड़े हो गए हैं।
धार्मिक संदर्भ में भी उन्होंने सरकार को घेरा “अगर किसी पूजनीय शंकराचार्य का अपमान होता है, तो क्या यही सनातन परंपरा है?”
अंत में उनका संदेश साफ था“अंत में सबको मरना है, इसलिए लोकतंत्र बचाने के लिए आगे आओ”।


