– छठे दिन जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-रजिस्ट्रीकरण प्रणाली के विरोध में तहसील सदर के अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। मंगलवार को आंदोलन के छठे दिन अधिवक्ताओं, कातिबों और स्टांप विक्रेताओं ने कामकाज पूरी तरह ठप रखकर तहसील परिसर में जुलूस निकाला और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
तहसील सदर स्थित रजिस्ट्री कार्यालय के बाहर एकत्र हुए अधिवक्ता एवं दस्तावेज लेखक जुलूस के रूप में तहसील परिसर से तहसील तिराहे तक पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने “काला कानून वापस लो”, “वकील विरोधी कानून वापस लो”, “तानाशाही नहीं चलेगी”, “हड़ताल अभी जारी है” तथा “जोर-जुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है” जैसे नारे लगाए।
दस्तावेज लेखक संघ के महामंत्री मनोज त्रिवेदी ने कहा कि सभी दस्तावेज लेखक किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता और दस्तावेज लेखक पूरी तरह एकजुट हैं और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार प्रस्तावित व्यवस्था पर पुनर्विचार नहीं करती।
तहसील सदर बार एसोसिएशन के सचिव अतुल मिश्रा ने कहा कि सरकार ने अभी तक ई-रजिस्ट्रीकरण प्रणाली को वापस लेने पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल रोजगार का नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है, जिसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन में अतुल योगेश दीक्षित, विकास सक्सेना, संजीव भारद्वाज, अनूप शर्मा, संजय शाक्य, कुलदीप त्रिपाठी, अनूप कटियार, रुखमंगल सिंह चौहान, नासिर खान, नीरज कुमार, रविनेश चंद्र यादव, पंकज राजपूत, आकाश दीक्षित, राजीव चौहान, दिलीप कश्यप, ओम प्रकाश दुबे, फिरोज अली खान, अंशुमान सिंह, संजय कटियार, राजेश वर्मा, सतेंद्र शाक्य, संजीव शाक्य, निखिल मिश्रा, घनश्याम सक्सेना तथा गोकुलेश सक्सेना सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, दस्तावेज लेखक, कातिब और स्टांप विक्रेता मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ई-रजिस्ट्रीकरण प्रणाली को वापस लेने अथवा इस पर पुनर्विचार करने का निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


