– बोलीं 3 दिन जिले में ‘एग्जाम इमरजेंसी प्लान’ लागू
फर्रुखाबाद। जनपद में 25, 26 और 27 अप्रैल को होने वाली यूपी होमगार्ड भर्ती परीक्षा को लेकर प्रशासन ने अभूतपूर्व सतर्कता अपनाई है। नवागत जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए साफ संकेत दिए हैं कि इस बार परीक्षा सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि “जीरो एरर ऑपरेशन” के तहत कराई जाएगी।
कोषागार में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद डीएम ने इस बड़ी भर्ती परीक्षा को अपनी प्राथमिकता में रखते हुए अफसरों की जवाबदेही तय कर दी है। बैठक में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि किसी भी स्तर पर अव्यवस्था या लापरवाही सामने आई तो सीधे कार्रवाई होगी।
सबसे अहम फैसला अभ्यर्थियों की सुविधा को लेकर लिया गया है। डीएम ने सभी परीक्षा केंद्रों पर क्लॉक रूम अनिवार्य रूप से स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बाहर से आने वाले हजारों परीक्षार्थियों को बैग और जरूरी सामान रखने में कोई दिक्कत न हो। साथ ही बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन पर विशेष हेल्प सेंटर बनाए जाएंगे, जहां से अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र, रूट और अन्य जरूरी जानकारी तुरंत मिल सकेगी।
भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने इस बार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर विशेष फोकस किया है। डीएम ने सभी केंद्रों पर मेडिकल कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं, जहां ओआरएस, ग्लूकोज और जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखा जाएगा। निर्देश साफ हैं—लू या तबीयत बिगड़ने की स्थिति में अभ्यर्थी को तत्काल इलाज मिले, इसमें कोई देरी न हो।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
परीक्षा केंद्रों पर पुलिस बल की तैनाती, चेकिंग, और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष प्लान तैयार किया गया है। प्रशासन को आशंका है कि तीनों दिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जिले में पहुंचेंगे, जिससे यातायात और भीड़ का दबाव बढ़ सकता है। इसी को देखते हुए ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी अलग से रणनीति बनाई जा रही है।
बैठक में पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), अपर पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), सभी उपजिलाधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि समन्वय के साथ परीक्षा संपन्न कराई जा सके।
यह भर्ती परीक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है—एक तरफ भीषण गर्मी, दूसरी तरफ हजारों अभ्यर्थियों का दबाव। नई डीएम की पहली बड़ी परीक्षा भी यही है कि क्या ये तैयारियां कागजों से निकलकर जमीन पर असर दिखाती हैं या नहीं।


