– माफियाओं के सफाए से चमकी पहचान
– योगी सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ को दी धार
लखनऊ/कानपुर। कानून-व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए उत्तर प्रदेश शासन ने कानपुर जोन के एडीजी आलोक सिंह को प्रोन्नत कर पुलिस महानिदेशक (डीजी ) रैंक प्रदान कर दिया है। 29 अप्रैल 2026 को जारी शासनादेश के मुताबिक, 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक सिंह को लेवल-16 में पदोन्नति दी गई है।
यह प्रोन्नति ऐसे समय में हुई है जब प्रदेश में अपराध और माफिया नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई तेज है, और आलोक सिंह का नाम उन अफसरों में गिना जाता है जिन्होंने मैदान में उतरकर बड़े-बड़े अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ा।
आलोक सिंह की छवि एक सख्त और जमीनी अफसर की रही है। उनके कार्यकाल में कुख्यात अपराधियों और माफियाओं पर लगातार शिकंजा कसा गया।
कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में गैंगस्टर नेटवर्क पर बड़े ऑपरेशन चलाए गए
अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर और कुर्की की कार्रवाई को तेज किया गया
अपराधियों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने की रणनीति को प्रभावी तरीके से लागू किया गया।
प्रदेश में चर्चित अपराधी विकास दुबे जैसे दुर्दांत गैंगस्टर के खात्मे के बाद पुलिस की सख्ती की जो छवि बनी, उसे आगे बढ़ाने में भी ऐसे अफसरों की भूमिका अहम रही। वहीं माफिया अनुपम दुबे जैसे नामों पर कार्रवाई ने भी अपराध जगत में खौफ पैदा किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत पुलिस महकमे में ऐसे अधिकारियों को आगे बढ़ाया जा रहा है जो सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं। आलोक सिंह की पदोन्नति इसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में यूपी में गैंगस्टर एक्ट के तहत हजारों करोड़ की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं और सैकड़ों अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई हुई है। ऐसे में आलोक सिंह जैसे अफसरों को उच्च जिम्मेदारी देना सरकार के उस संदेश को और मजबूत करता है कि अपराध और माफिया के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है।
आलोक सिंह की पदोन्नति केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक संकेत है प्रदेश में अब वही अधिकारी आगे बढ़ेंगे जो जमीन पर परिणाम देंगे। माफिया के खिलाफ लगातार कार्रवाई और सख्त कानून व्यवस्था की नीति के बीच यह प्रमोशन आने वाले समय में पुलिसिंग को और आक्रामक बना सकता है।
कानपुर के एडीजी आलोक सिंह बने डीजीपी रैंक


