– श्रमिकों को बताया संस्थान की असली ताकत
फर्रुखाबाद। डीपीएस फर्रुखाबाद में 1 मई 2026 को मजदूर दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में श्रमिकों को सम्मानित कर संस्थान ने एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन ने कर्मचारियों को माला पहनाकर और उपहार देकर उनका सम्मान किया, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सिर्फ एक दिन का सम्मान ही श्रमिकों के अधिकारों की पूर्ति के लिए पर्याप्त है?
विद्यालय के निदेशक विजय कटियार और निदेशिका सुनीता कटियार ने कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों को सम्मानित करते हुए मजदूर दिवस को श्रमिकों के संघर्ष और योगदान का प्रतीक बताया। प्रबंधन के मुताबिक, संस्थान की प्रगति में कर्मचारियों की भूमिका अहम है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्राइवेट स्कूलों में काम करने वाले कर्मचारियों की वेतन संरचना और कार्य परिस्थितियों पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।
कार्यक्रम में स्कूल के प्रबंधक प्रतीक्य कटियार, कनिका कटियार और प्रिंसिपल अनुज लाल ने भी श्रमिकों को शुभकामनाएं दीं और उनके योगदान की सराहना की। हालांकि, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों में कार्यरत करीब 60% कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
मजदूर दिवस पर आयोजित ऐसे कार्यक्रम जहां एक ओर सम्मान का प्रतीक बनते हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी जरूरी है कि श्रमिकों को सालभर बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्य वातावरण और अधिकारों की गारंटी मिले। फर्रुखाबाद जैसे जिलों में निजी संस्थानों में काम कर रहे कर्मचारियों की स्थिति पर प्रशासन की निगरानी भी अक्सर सवालों के घेरे में रहती है।
यूथ इंडिया की पड़ताल में यह सामने आया है कि कई संस्थानों में श्रमिकों के लिए ईपीएफ, ईएसआई जैसी सुविधाएं कागजों तक सीमित हैं। ऐसे में मजदूर दिवस पर सम्मान के साथ-साथ ठोस सुधार की जरूरत भी उतनी ही जरूरी है।
डीपीएस में मजदूर दिवस पर सम्मान समारोह संपन्न


