मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के सामने अपनी पार्टी को एकजुट बनाए रखने की नई चुनौती खड़ी हो गई है। दिल्ली में बुलाई गई पार्टी की आपात बैठक में 9 में से केवल 3 लोकसभा सांसदों के पहुंचने से उद्धव गुट में संभावित टूट की अटकलें और तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के 6 सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं और उनके शिंदे गुट में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
पार्टी नेतृत्व ने स्थिति को संभालने के लिए दिल्ली के पुराने संसद भवन में आपात बैठक बुलाई थी तथा सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तीन-पंक्ति व्हिप भी जारी किया गया था। इसके बावजूद अधिकांश सांसदों की अनुपस्थिति ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। बैठक में राज्यसभा सांसद संजय राउत सहित केवल तीन सांसद ही उपस्थित हुए, जबकि छह सांसदों के न आने से पार्टी के भीतर असंतोष और विद्रोह की आशंकाओं को बल मिला है।
बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे स्वयं लगातार सांसदों से संपर्क साधकर संगठन को एकजुट रखने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं संजय राउत ने अनुपस्थित सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें पार्टी के प्रति निष्ठा निभाने की नसीहत दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सांसद शिंदे गुट का रुख करते हैं तो यह 2022 में हुई शिवसेना की ऐतिहासिक टूट के बाद उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।


