अयोध्या। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर से जुड़े ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। दानराशि में कथित गड़बड़ी के मामले के बीच सामने आए वित्तीय दस्तावेजों ने ट्रस्ट के खर्चों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दस्तावेजों के अनुसार, 11 महीनों में सुरक्षा व्यवस्था पर लगभग 10 करोड़ रुपये और भोग-प्रसाद मद में करीब 11 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मंदिर परिसर की सुरक्षा पहले से ही केंद्र और प्रदेश सरकार की एजेंसियों, पुलिस बल और अत्याधुनिक निगरानी व्यवस्था के हवाले है, तो ट्रस्ट द्वारा सुरक्षा मद में खर्च की गई इतनी बड़ी राशि आखिर कहां और किस व्यवस्था पर खर्च हुई।
वित्तीय विवरण के अनुसार अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक ट्रस्ट को दान और अन्य स्रोतों से सैकड़ों करोड़ रुपये की आय हुई। इसी दौरान दान पेटियों की निगरानी और दानराशि में कथित अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए। ऐसे में करोड़ों रुपये के सुरक्षा खर्च के बावजूद दान पेटियों से जुड़ी गड़बड़ियों के आरोपों ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भोग-प्रसाद के नाम पर हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये खर्च दिखाया जाना भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट के भीतर फैसलों और वित्तीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष है। आरोप हैं कि कई महत्वपूर्ण निर्णय सीमित दायरे में लिए जा रहे हैं और सभी सदस्यों को पूरी जानकारी नहीं मिल रही। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दानराशि, सुरक्षा खर्च और भोग-प्रसाद मद में हुए व्यय को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चल रही जांच में केवल दानराशि गड़बड़ी ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के इन खर्चों की भी गहन पड़ताल की जाती है या नहीं। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।


