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Monday, June 8, 2026

वस्त्रोद्योग के लिए नई कौशल विकास व्यवस्था तैयार हो, ग्रामोद्योग और माटीकला क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को मिले नई गति : मुख्यमंत्री

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पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था: मुख्यमंत्री

उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार होगा कुशल मानव संसाधन, प्रशिक्षण और रोजगार को जोड़ने पर जोर

ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

वित्तीय सहायता, कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन और विपणन सुविधाओं को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए

लखनऊ, 08 जून:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वस्त्र क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप व्यापक कौशल विकास कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और रोजगार की दृष्टि से देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उद्योगों को समय पर प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों का लक्ष्य केवल प्रशिक्षण तक सीमित न होकर युवाओं को रोजगार और आजीविका से जोड़ना होना चाहिए।

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार समर्थ योजना के अंतर्गत अब तक 2.28 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि 1.60 लाख से अधिक प्रशिक्षार्थियों को रोजगार से जोड़ा गया है। महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है और कुल प्रशिक्षार्थियों में उनका हिस्सा 87 प्रतिशत से अधिक है। वहीं उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से भी बड़ी संख्या में युवाओं को वस्त्र क्षेत्र से संबंधित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वस्त्र क्षेत्र में तकनीकी बदलाव अत्यंत तेजी से हो रहे हैं। ऑटोमेशन, आधुनिक मशीनरी तथा टेक्निकल टेक्सटाइल्स जैसे नए क्षेत्रों के विस्तार को देखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समयानुकूल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं का आकलन करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक उपयोगी और रोजगारपरक बनाया जाए।

बैठक में अधिकारियों ने वस्त्र क्षेत्र के लिए प्रस्तावित कौशल विकास व्यवस्था की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसमें उद्योगों, प्रशिक्षण संस्थानों तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए प्रशिक्षण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। साथ ही प्रशिक्षण की गुणवत्ता, पारदर्शिता, निगरानी और रोजगार परिणामों को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्थाओं के विकास पर भी चर्चा हुई।

माटीकला क्षेत्र की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार से सीधे जुड़ा हुआ है। मिट्टी से निर्मित उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ बड़ी संख्या में कारीगर परिवारों की आजीविका का आधार भी हैं। उन्होंने माटीकला उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने, कारीगरों को आधुनिक डिजाइन, सोलर चाक उपलब्ध कराने, नई तकनीक, बेहतर उपकरण, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं से जोड़ने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 तक 1,331 इकाइयों की स्थापना की गई है। इन इकाइयों में 3,302.37 लाख रुपये का पूंजी निवेश हुआ है तथा 557.18 लाख रुपये की मार्जिन मनी सहायता उपलब्ध कराई गई है। माटीकला महोत्सवों, प्रदर्शनियों और मेलों के माध्यम से कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 300 इकाइयों की स्थापना के लक्ष्य के सापेक्ष बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने लंबित ऋण प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक उद्योगों को केवल संरक्षण की नहीं, बल्कि नवाचार, ब्रांडिंग, डिजिटलीकरण और आधुनिक बाजार से जुड़ाव की आवश्यकता है। माटीकला के उत्पादों को ई-कॉमर्स, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन प्रणालियों से जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रशिक्षण, बैंकों से समन्वय बनाकर वित्तीय सहायता, तकनीकी उन्नयन, विपणन और रोजगार सृजन की पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

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