42.8 C
Lucknow
Sunday, June 7, 2026

मानसिक गुलामी का नया दौर…

Must read

(विवेकानंद-विनायक फीचर्स)
ऐसा लगता है, जैसे अति गोपनीय स्थान पर बन रहा पेपर, टेस्ट से कुछ रोज पहले अचानक निकला और कोचिंग मालिकों के पास पहुंचकर बोला-लीजिए मुझे लीक कर दीजिए क्योंकि जिम्मेदारों से न तो कोई सवाल पूछ रहा है और न वे जवाबदेही लेने के इच्छुक दिखाई दे रहे हैं।
उसकी मानसिकता क्या होगी जो अपने ही बच्चों के पक्ष में उठ रहे सवालों को भ्रमित करने का जोर लगा रहा है और सवाल उठाने वालों के लिए जहर की बोलत लेकर घूम रहा है। क्या यही मानसिक गुलामी नहीं है?
सवाल किसी पेपर के लीक होने का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जो पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी के बाद 50-60 परीक्षाओं का पेपर लीक होने से नहीं रोक पाई। निश्चित तौर पर इसमें कोचिंग माफिया का बड़ा रोल रहा होगा। लेकिन क्या यह बिना उनके बिके संभव है, जिनके ऊपर पेपर की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी है? क्या उन्हें पेपर लीक के सवाल से मुक्त कर देना चाहिए? क्या सरकारों की कोई जिम्मेदारी नहीं है?
अफसोस होना चाहिए जब देश के किशोरे, युवा किसी पेपर लीक जैसी घटना के बाद आत्महत्या कर लेते हैं, किसी परीक्षा का रिजल्ट रुक जाने से सदमे में आकर आत्महत्या कर लेते हैं, सड़कों पर नारेबाजी करते हैं, लाठियां खाते हैं और सरकारें युवा दिवस मनाने की बात करती हैं। सवाल पूछने वालों पर देशद्रोह की तोहमत जड़ दी जाती है। जहां पेपर लीक जैसी अव्यवस्था से नौजवान आत्महत्या कर रहे हों, वहां किसी और प्रयास की क्या जरूरत है?
लेकिन अफसोस एकतरफा नहीं है। उस समाज के विषय में भी उतना ही अफसोस होना चाहिए जो अपने ही बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होता देखकर खामोशी ओढ़े हुए है। जो अपने ही बेरोजगार युवाओं पर देशद्रोह की तोहमत मंजूर कर लेता है, जो अपने ही किसानों में विदेशी साजिश सूंघ लेता है।
नीट पेपर लीक कोई अलबेला मामला नहीं है। दुखदायी यह है कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने की बजाए उनकी चिंता का पांखड अधिक सुर्खियों में है। ऐसी कार्रवाईयों पर अभिनंदन बरसाने के आग्रह किए जा रहे हैं, जिनकी आवश्यकता होनी ही नहीं चाहिए। सूचना तंत्र हर कार्रवाई और फैसले को ऐतिहासिक बता रहा है। परीक्षा पर चर्चा के लिए ‘एरर लेस’ व्यवस्था होती है और परीक्षाओं में एरर ही एरर मिल रहे हैं।
2024 में जब पेपर लीक का मामला सामने आया था तब ऐसे दावे किए गए थे कि अब सब चाकचौबंद हो जाएगा। लेकिन न परीक्षा की व्यवस्था सुधरी न पकड़े गए आरोपियों को अब तक सजा मिली। यह केवल एक मामले की कहानी नहीं है, अधिकांश मामलों के आरोपियों को सजा नहीं हुई। उल्टा लटका देंगे, सीधा कर देंगे जैसी सड़कछाप बयानबाजियों से सुर्खियों बटोरने वाले नेता अपने राजनीतिक एजेंडे में मग्न हैं। जिन पर सवाल पूछने की जिम्मेदारी है,वह बहस को इस तरह डिजाइन कर रहा है कि उसकी रस्म भी निभ जाए और आकाओं की जिम्मेदारी की ओर लोगों का ध्यान भी न जाए।
2024 के पेपर लीक मामले में सीबीआई ने 45 आरोपियों को चिन्हित किया था। करीब डेढ़ सौ लाभार्थियों की पहचान भी की। राकेश रंजन, संजीव कुमार सिंह सहित कई लोग गिरफ्तार भी हुए थे। संजीव मुखिया पर तीन लाख रुपए का इनाम घोषित था। एजेंसियों ने बड़े सबूत जुटाने के दावे किए, लेकिन अब तक किसी को सजा नहीं मिली। कुछ न्यायिक हिरासत में हैं कुछ जमानत पर बाहर आ गए हैं। इतनी सख्त कार्रवाई से पेपर लीक जैसी घटनाएं रुकेंगी?
क्या यह कम शर्म की बात है कि एक 12वीं कक्षा का छात्र भारी-भरकम सीबीएससी बोर्ड की व्यवस्था की पोल खोल दे? क्या पूरे बोर्ड के जिम्मेदार जिनके फैसलों से लाखों बच्चों की मेहतन से खिलवाड़ किया गया अस्तित्व में रहने लायक है? जिन्होंने ऑनस्क्रीन मार्किंग पर काम किया होगा क्या उनकी लापरवाहियां किसी तरह माफी योग्य हैं? नीट पेपर लीक में अब तक कम से कम 14 बच्चों द्वारा आत्महत्या करने की खबरें हैं। इनकी मौत का इल्जाम किसके सिर होगा? परीक्षा तो दोबारा करा लोगे मेरी बच्ची को वापस ला पाओगे, एक मां के इस सवाल का जवाब किसी के पास है? आधी-अधूरी सुविधाओं में भी एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने का श्रेय लेने वाले आगे आकर इसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते?
बच्चों के साथ जिस बेरहमी से प्रयोग किए जा रहे हैं वह शर्मनाक हैं। स्कूलों में बच्चों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की बजाए राजनीतिक दखल बढ़ाए जा रहे हैं। नेता स्कूलों में जाते हैं, वहां शिक्षा व्यवस्था की बातें कम करते हैं, अपनी सरकारों के काम अहसान की तरह गिनाते हैं। अयोध्या से लेकर पाकिस्तान तक की बातें की जाती हैं। कोई इतना मासूम नहीं है कि उसे 18 साल की उम्र में पहुंचने वाले युवा को वोटरों में तब्दील करने के प्रयास दिखाई न देते हों। फिर भी अजीब खामोशी है। यही मानसिक गुलामी है? (विनायक फीचर्स)

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article