मैनपुरी
जनपद में गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाले फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर प्रशासन ने रफ्तार तेज कर दी है। भूमि खरीद और रजिस्ट्री की धीमी प्रक्रिया पर जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब किसानों की सहूलियत के लिए गांव-गांव में कैंप लगाकर रजिस्ट्री प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि महत्वाकांक्षी परियोजना समय पर पूरी हो सके।
भोगांव तहसील क्षेत्र के करीब 12 गांव इस परियोजना के दायरे में आते हैं, जहां से एक्सप्रेसवे का निर्माण प्रस्तावित है। प्रशासन द्वारा अब तक 200 से अधिक किसानों की भूमि की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है, लेकिन तय लक्ष्य के मुकाबले यह गति काफी धीमी मानी जा रही है। इसी को लेकर डीएम ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सुधार लाने के निर्देश दिए हैं।
यह परियोजना प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में गिनी जा रही है। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम ने साफ कहा है कि जो भी कर्मचारी या अधिकारी काम में ढिलाई बरतेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएम के निर्देश के बाद एसडीएम संध्या शर्मा ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने प्रतिदिन होने वाली भूमि रजिस्ट्री की संख्या बढ़ाने के लिए लेखपालों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को कड़ी हिदायत दी है। साथ ही तहसीलदार को निर्देशित किया गया है कि वह क्षेत्र के लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों की कार्यप्रणाली की रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
प्रशासन की सख्ती के चलते चार लेखपालों—देवेंद्र प्रताप, नवनीत मौर्य, शिवकुमार और दीपक—को नोटिस जारी किया गया है। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में रजिस्ट्री प्रतिशत बढ़ाने और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा संबंधित गांवों में विशेष कैंप लगाकर किसानों को रजिस्ट्री के लिए प्रेरित करने की योजना बनाई गई है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित की जा सके।
प्रशासन का मानना है कि कैंप के माध्यम से किसानों की समस्याओं का मौके पर समाधान होगा और उन्हें रजिस्ट्री प्रक्रिया के लिए बार-बार तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि परियोजना को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी।
फिलहाल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है और परियोजना को लेकर हर स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अब देखना यह होगा कि डीएम की सख्ती के बाद भूमि अधिग्रहण और रजिस्ट्री प्रक्रिया में कितनी तेजी आती है और यह महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे परियोजना कब तक जमीन पर उतर पाती है।


