इटावा
जनपद के जसवंतनगर क्षेत्र में छह साल पुराने चर्चित मारपीट प्रकरण में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी नौ आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रथम की अदालत में लंबी सुनवाई के बाद यह निर्णय सुनाया गया, जिससे आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।
मामला थाना बलरई क्षेत्र के ग्राम पीहरपुर का है, जहां निवासी अंजली देवी ने वर्ष 2022 में गांव के ही राजेश समेत उनके परिवार के नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने मिलकर बलवा किया, मारपीट की, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी थी, जिसके बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपों को साबित करने के लिए अपने साक्ष्य और गवाह पेश किए, लेकिन बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अदालत के समक्ष मजबूत तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष का कहना था कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह विफल रहा है, जिससे मामला संदेह के घेरे में आ गया।
दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका। इसी आधार पर कोर्ट ने सभी आरोपियों—राजेश, टेलर उर्फ रुकनपाल, बंटू उर्फ विनोद, पेंटर उर्फ किशनपाल, आलोक, मोहित, रोकी, स्नेहलता और जूली—को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
इस फैसले के बाद आरोपियों और उनके परिजनों में राहत का माहौल है, वहीं वादी पक्ष में निराशा देखी जा रही है। यह निर्णय एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि न्यायालय में साक्ष्यों की मजबूती और गवाहों की विश्वसनीयता किसी भी मामले के परिणाम को तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
फिलहाल इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन अदालत के इस फैसले ने लंबे समय से चल रहे विवाद का पटाक्षेप कर दिया है।


