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Thursday, April 9, 2026

भारत का बढ़ता रक्षा बजट बना अर्थव्यवस्था का इंजन: आईएमएफ ने जताई मजबूत विकास की उम्मीद

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वॉशिंग्टन। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के बढ़ते रक्षा बजट और स्वदेशी उत्पादन पर जोर को देश की आर्थिक प्रगति के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। हालिया विश्लेषण में कहा गया है कि यदि रक्षा खर्च का बड़ा हिस्सा घरेलू विनिर्माण में लगाया जाए, तो यह अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है।

आईएमएफ के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में निवेश केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह व्यापक आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करता है। इससे उपभोग, निवेश और रोजगार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वृद्धि देखने को मिलती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जब सैन्य खर्च स्थानीय उद्योगों को समर्थन देता है, तो उत्पादन क्षमता बढ़ती है और अर्थव्यवस्था के भीतर मांग मजबूत होती है। इससे देश के औद्योगिक ढांचे को भी मजबूती मिलती है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच कई देश अपने रक्षा बजट में वृद्धि कर रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत का स्वदेशीकरण पर ध्यान उसे अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में खड़ा कर सकता है।

आईएमएफ ने रक्षा खर्च के “मल्टीप्लायर प्रभाव” का भी जिक्र किया है। इसके अनुसार, रक्षा पर किया गया खर्च लगभग उसी अनुपात में आर्थिक उत्पादन को बढ़ा सकता है, बशर्ते यह खर्च देश के भीतर ही किया जाए।

भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से अनुकूल मानी जा रही है, क्योंकि देश तेजी से विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम कर रहा है। सरकार की नीतियों के चलते रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र और संयुक्त उद्यमों की भागीदारी भी बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा निर्माण से न केवल आयात घटेगा, बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे आर्थिक संतुलन बेहतर होगा और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम पड़ेगा।

आईएमएफ ने यह भी कहा है कि रक्षा खर्च एक “लक्षित मांग झटका” की तरह काम करता है, जो सरकारी खर्च को बढ़ाता है और निजी निवेश को भी आकर्षित करता है। इससे दीर्घकाल में उत्पादकता में सुधार संभव है।

हालांकि, रिपोर्ट में कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया गया है। यदि रक्षा खर्च बहुत तेजी से बढ़ता है, तो इससे राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है और सार्वजनिक ऋण पर दबाव आ सकता है।

अनुमान के अनुसार, अत्यधिक रक्षा खर्च से जीडीपी के मुकाबले घाटा करीब 2.6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है और तीन वर्षों में सार्वजनिक ऋण लगभग 7 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका रहती है।

वैश्विक परिदृश्य में देखें तो वर्तमान में लगभग 40 प्रतिशत देश अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत से अधिक रक्षा पर खर्च कर रहे हैं। कई विकसित देश भी अपने रक्षा बजट को लगातार बढ़ा रहे हैं।

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