इस्लामाबाद। ईरान-अमेरिका युद्धविराम को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक खुलासा सामने आया है, जिसने पाकिस्तान की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का सोशल मीडिया पोस्ट अमेरिका की जानकारी और मंजूरी के बाद ही साझा किया गया था।
जानकारी के मुताबिक, यह पोस्ट उस समय किया गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त समयसीमा दी थी और क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच चुका था। ऐसे में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि शहबाज शरीफ द्वारा साझा किया गया संदेश पहले ही व्हाइट हाउस को दिखाया गया था, जहां से उसे हरी झंडी मिलने के बाद सार्वजनिक किया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कदम एक समन्वित कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा था।
शरीफ ने अपने पोस्ट में ट्रंप की शैली में लिखते हुए कूटनीति को “मजबूत और प्रभावी” बताया और डेडलाइन बढ़ाने की अपील की। उन्होंने ट्रंप और उनके सहयोगियों को टैग करते हुए तनाव कम करने की बात कही थी।
हालांकि, इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया था। शुरुआत में पोस्ट में “ड्राफ्ट” शब्द दिखाई देने से लोगों ने यह अटकलें लगानी शुरू कर दीं कि यह संदेश किसी और द्वारा तैयार किया गया है।
बाद में अमेरिकी पक्ष ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने यह पोस्ट खुद नहीं लिखा, लेकिन यह जरूर स्वीकार किया गया कि इसे साझा करने से पहले इसकी समीक्षा की गई थी। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में पर्दे के पीछे किस तरह समन्वय होता है। कई बार सार्वजनिक बयान केवल रणनीति का एक हिस्सा होते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम का असर भी तेजी से देखने को मिला। शहबाज शरीफ के पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति जताने की घोषणा कर दी।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान ने इस पूरे मामले में खुद को जरूरत से ज्यादा प्रमुखता देने की कोशिश की, जबकि वास्तविक नियंत्रण अमेरिका के हाथ में था।
सोशल मीडिया पर भी शहबाज शरीफ को इस मुद्दे को लेकर काफी ट्रोल किया गया। यूजर्स ने उनके पोस्ट को “पूर्व-निर्धारित स्क्रिप्ट” करार दिया और उनकी भूमिका पर सवाल उठाए।
दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति स्थापित करने में सकारात्मक भूमिका निभाई और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने में योगदान दिया।


