वॉशिंगटन। अमेरिका में जाति आधारित भेदभाव को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। इस बार मामला अदालत तक पहुंच गया है, जहां हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया है कि भारतीय और हिंदू समुदाय को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कैलिफोर्निया की नागरिक अधिकार एजेंसी के खिलाफ अमेरिकी अपीलीय अदालत में याचिका दायर की है। संगठन का कहना है कि एजेंसी ने जाति के मुद्दे को गलत तरीके से हिंदू धर्म और भारतीय मूल के लोगों से जोड़ दिया है।
यह याचिका अमेरिकी नौवें सर्किट अपील न्यायालय में दायर की गई है, जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। फाउंडेशन का आरोप है कि जिला अदालत ने मामले के मूल मुद्दों पर विचार किए बिना ही उसे खारिज कर दिया।
दरअसल, यह विवाद सिस्को सिस्टम्स और उसके दो प्रबंधकों के खिलाफ दर्ज एक शिकायत से जुड़ा है। इस शिकायत में जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप लगाए गए थे।
यह कार्रवाई कैलिफोर्निया के फेयर एम्प्लॉयमेंट एंड हाउसिंग एक्ट के तहत की गई थी। नागरिक अधिकार विभाग का कहना था कि कंपनी के भीतर जातिगत भेदभाव की शिकायतें सामने आई थीं, जिनकी जांच जरूरी थी।
हालांकि, हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन का आरोप है कि एजेंसी ने अपनी कार्रवाई में जाति को हिंदू धर्म से जोड़ते हुए भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदाय की एक नकारात्मक छवि पेश की है।
संगठन का कहना है कि शिकायत में बार-बार “जाति” शब्द का इस्तेमाल इस तरह किया गया, जिससे यह धारणा बनी कि भारतीय मूल के कर्मचारी स्वाभाविक रूप से जातिगत भेदभाव करते हैं।
फाउंडेशन ने एजेंसी की कार्रवाई को “नस्लवादी और तथ्यहीन” बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के आरोप न केवल गलत हैं, बल्कि इससे पूरे समुदाय की छवि प्रभावित होती है।
मामले में एक और विवाद तब सामने आया जब एजेंसी ने पहले अपने बयान में भारतीय समाज को “कठोर धार्मिक पदानुक्रम” से जोड़कर पेश किया था। हालांकि, बाद में इस बयान को हटा दिया गया, लेकिन विवाद शांत नहीं हुआ।
हिंदू संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल एक कंपनी या एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक असर भारतीय, हिंदू और दक्षिण एशियाई समुदायों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका जैसे बहुसांस्कृतिक समाज में इस तरह के मुद्दों को संवेदनशीलता और संतुलन के साथ संभालना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी समुदाय को अनावश्यक रूप से निशाना न बनाया जाए।


