विद्यालय में गड़बड़ी उजागर करने पर बवालबी
बीजेपी मंडल मंत्री से अभद्रता
खंड शिक्षा अधिकारी पर रिश्वत मांगने व विधायिका का नाम लेकर दबाव बनाने के गंभीर आरोप
फर्रुखाबाद| थाना जहानगंज क्षेत्र के ग्राम पंचायत लउआ नगला मान पट्टी के प्राथमिक विद्यालय पट्टीया छेदा सिंह में उजागर हुई अनियमितताओं ने अब बड़ा खड़ा कर दिया है। गांव निवासी संदीप कुमार कठेरिया, जो भारतीय जनता पार्टी के मंडल मंत्री हैं और वर्तमान ग्राम प्रधान बड़ी बिटिया के पुत्र हैं ने पूरे घटनाक्रम को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
घटना की शुरुआत तब हुई जब ग्रामीणों ने विद्यालय में मध्यान्ह भोजन समय से न मिलने, घटिया गुणवत्ता का खाना परोसे जाने और बच्चों से अनुचित कार्य कराए जाने की शिकायत की। इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए संदीप कुमार स्वयं विद्यालय पहुंचे। आरोप है कि वहां की प्रधानाध्यापिका मीना परिहार ने उनके साथ न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित भी किया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात भी सामने आई है, जिससे मामला और तूल पकड़ गया।
इसके बाद संदीप कुमार ने पूरे प्रकरण की शिकायत जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित की गई, लेकिन यहीं से मामला और विवादित हो गया।
प्रार्थी का आरोप है कि जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे खंड शिक्षा अधिकारी वीरेंद्र पटेल ने निष्पक्षता को ताक पर रख दिया। उन्होंने विद्यालय पहुंचकर केवल प्रधानाध्यापिका के करीबी लोगों के बयान दर्ज किए और शिकायतकर्ता को दरकिनार कर दिया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जांच के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी ने संदीप कुमार को अलग ले जाकर 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि प्रधानी चुनाव नजदीक है, पैसे दे दो तो रिपोर्ट तुम्हारे पक्ष में लगा दी जाएगी।जब संदीप कुमार ने यह कहते हुए रिश्वत देने से साफ इनकार कर दिया कि वह भारतीय जनता पार्टी के मंडल मंत्री हैं और ऐसे भ्रष्टाचार का हिस्सा नहीं बनेंगे, तो अधिकारी का रवैया अचानक बदल गया। आरोप है कि उन्होंने गुस्से में आकर धमकी भरे अंदाज में बात की और कायमगंज क्षेत्र की विधायिका का नाम लेते हुए दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, विधायिका मेरी रिश्तेदार हैं, ज्यादा नेतागिरी मत करो।
प्रार्थी का कहना है कि इसके बाद अधिकारी ने बिना उसका पक्ष सुने ही जांच पूरी कर दी और एकतरफा रिपोर्ट तैयार कर दी। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई संभव नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम से न केवल शिकायतकर्ता की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची, बल्कि जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
गंभीर बात यह भी है कि शिकायत के बावजूद विद्यालय में फर्जी उपस्थिति दर्ज करने और अन्य अनियमितताओं का सिलसिला अब भी जारी होने का आरोप है।
यह पूरा मामला अब शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार, सत्ता के नाम पर दबाव बनाने और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है। एक ओर जहां शिकायतकर्ता खुद सत्ताधारी दल का पदाधिकारी है, वहीं दूसरी ओर उसके साथ इस तरह के व्यवहार के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था की साख पर सीधा प्रहार करते हैं।
अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि क्या इस गंभीर प्रकरण में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होगी या फिर आरोपों की यह आग भी सिस्टम की फाइलों में ठंडी कर दी जाएगी।ज़ब इस संदर्भ मैं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि प्रधान और खंड शिक्षा अधिकारी को सामने बुलाकर सुनवाई करेंगे।


