लखनऊ। प्रदेश में विद्युत स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदलने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में मामला विद्युत नियामक आयोग तक पहुंच गया है, जहां उपभोक्ताओं की शिकायतों पर गंभीर रुख अपनाया गया है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में लगभग 70 लाख स्मार्ट मीटरों को बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्रीपेड मोड में बदल दिया गया था। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए आयोग ने इसे अवैध करार दिया है और बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना उपभोक्ताओं की लिखित सहमति के किसी भी स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। साथ ही, जिन उपभोक्ताओं के मीटर पहले ही प्रीपेड में बदले जा चुके हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से पोस्टपेड मोड में परिवर्तित करने के आदेश जारी किए गए हैं।
इस मामले में आयोग ने बिजली कंपनियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी करने के भी आदेश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितता दोबारा न हो। साथ ही उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
यह फैसला प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो बिना जानकारी और सहमति के प्रीपेड व्यवस्था में बदलाव से परेशान थे। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिजली कंपनियां इन निर्देशों का पालन कितनी तेजी और गंभीरता से करती हैं।
स्मार्ट मीटर विवाद गरमाया, बिना सहमति प्रीपेड में बदलाव अवैध—सभी कनेक्शन पोस्टपेड करने के निर्देश


