कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक सख्ती का बड़ा उदाहरण सामने आया है, जहां टाइपिंग परीक्षा में लगातार दो बार असफल रहने पर तीन जूनियर क्लर्कों का डिमोशन कर उन्हें चपरासी के पद पर भेज दिया गया है। यह कार्रवाई तय मानकों को पूरा न करने पर की गई है, जिससे सरकारी कार्यप्रणाली में दक्षता को लेकर प्रशासन का सख्त रुख स्पष्ट हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट में कार्यरत इन तीनों कर्मचारियों के लिए एक मिनट में 25 शब्द टाइप करना अनिवार्य था, लेकिन वे इस न्यूनतम मानक को भी पूरा नहीं कर सके। पहली बार परीक्षा में असफल होने पर प्रशासन ने चेतावनी स्वरूप उनकी सैलरी रोक दी थी और उन्हें दोबारा मौका दिया गया था। इसके बावजूद दूसरी बार भी वे परीक्षा में पास नहीं हो पाए।
इसके बाद जिलाधिकारी ने नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई करते हुए तीनों का डिमोशन कर दिया और उन्हें क्लर्क से चपरासी के पद पर नियुक्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया है और अन्य कर्मचारियों में भी अनुशासन और कार्यकुशलता को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी कार्यों में दक्षता और समयबद्धता बेहद जरूरी है, और ऐसे में न्यूनतम योग्यता पूरी न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है। वहीं, इस घटना के बाद यह संदेश भी गया है कि सरकारी विभागों में अब लापरवाही और अक्षमता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कानपुर कलेक्ट्रेट में सख्त कार्रवाई: 25 शब्द प्रति मिनट टाइप न कर पाने पर तीन बाबुओं का डिमोशन, बने चपरासी


