.मैनपुरी
जनपद में एक बुजुर्ग किसान की आत्महत्या की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुर्रा थाना क्षेत्र के गांव दौलतपुर निवासी 70 वर्षीय किसान संग्राम सिंह ने कथित तौर पर चकबंदी अधिकारियों की प्रताड़ना और आर्थिक परेशानियों से तंग आकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है, वहीं परिजनों और ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार संग्राम सिंह खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। सोमवार रात वह रोज की तरह भोजन करने के बाद अपने खेत पर बनी झोपड़ी में सोने के लिए गए थे। बताया जा रहा है कि देर रात किसी समय उन्होंने झोपड़ी के अंदर ही रस्सी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। मंगलवार सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर पहुंचे तो झोपड़ी के अंदर उनका शव फंदे से लटका मिला, जिसके बाद गांव में सनसनी फैल गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें मृतक किसान ने चकबंदी अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुसाइड नोट में उल्लेख किया गया है कि उनकी आलू की फसल खराब हो गई थी, जिससे वह पहले ही आर्थिक संकट में थे। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चकबंदी से जुड़े कर्मचारी उनसे पैसे की मांग कर रहे थे और लगातार मानसिक दबाव बना रहे थे।
परिजनों का कहना है कि संग्राम सिंह पिछले कुछ समय से बेहद परेशान और तनाव में चल रहे थे। फसल खराब होने के कारण आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी और ऊपर से अधिकारियों की कथित प्रताड़ना ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया। ग्रामीणों ने भी इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान किया जाता, तो शायद यह नौबत नहीं आती।
इस घटना के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समय पर समाधान करना बेहद जरूरी है, अन्यथा इस प्रकार की दुखद घटनाएं लगातार सामने आती रहेंगी।


