23 C
Lucknow
Tuesday, April 7, 2026

हाथरस से फर्रुखाबाद तक,जब चेतावनी अनसुनी हो और जिम्मेदारी सवालों में

Must read

– फर्रुखाबाद जिलाधिकारी की भूमिका पर बड़ा प्रश्न
– उनके इशारे पर खुफिया पुलिस लगा देती भ्रामक रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर उठते सवाल अब अलग-अलग घटनाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि एक खतरनाक पैटर्न के रूप में सामने आ रहे हैं। हाथरस में पत्रकार वेदप्रकाश की नाले में हत्या और फर्रुखाबाद में पत्रकार शरद कटियार की सुरक्षा से जुड़ा विवाद दोनों मामलों को साथ रखकर देखें, तो एक ही सवाल उभरता है, जब खतरे की जानकारी पहले से हो, तो प्रशासन क्यों चुप रहता है?

हाथरस में वेदप्रकाश ने अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस को शिकायत दी थी। यह एक चेतावनी थी एक अवसर था, जिसे गंभीरता से लिया जाता तो शायद एक जान बचाई जा सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नतीजा, उनका शव नाले में मिला और पूरा सिस्टम घटना के बाद सक्रिय होता नजर आया।

अब इसी परिप्रेक्ष्य में फर्रुखाबाद का मामला और अधिक गंभीर हो जाता है। यहां पत्रकार शरद कटियार को पूर्व में सुरक्षा प्रदान की गई थी, जिसका अर्थ था कि खतरे को प्रशासन ने स्वयं स्वीकार किया था। लेकिन बाद में उसी सुरक्षा एक सुनियोजित षडयंत्र और माफिया तंत्र की साठ गांठ के चलते फर्रुखाबाद की जनपद सुरक्षा समिति द्वारा जनता से संस्तुति भेजने के बाद भी उत्तर प्रदेश गृह विभाग के अनुभाग- 16 से समाप्त कर दिया गया—और वह भी ऐसे समय में जब खतरे कम नहीं, बल्कि लगातार बने हुए हैं, वह शासन प्रशासन के समर्थन में ही जीरो टॉलरेंस नीति के अनुसार अपराध और अपराधियों पर अपनी बेधड़क कलम के माध्यम से सहयोग कर रहे हैं ।

यहां सबसे बड़ा सवाल फर्रुखाबाद के जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी की भूमिका पर खड़ा होता है। जिला सुरक्षा समिति, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करते हैं, वही सुरक्षा देने और हटाने का निर्णय लेती है। ऐसे में यदि सुरक्षा हटाई जाती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी भी उसी तंत्र पर आती है।

फर्रुखाबाद में आरोप है कि जिलाधिकारी स्तर से ऐसी रिपोर्ट्स शासन को भेजी गईं, जिनमें वास्तविक स्थिति को नकारा गया—यह तक कहा गया कि संबंधित पत्रकार जिले में रहते ही नहीं, और परिवार सहित लखनऊ रहने लगे । जबकि उनकी प्रिंटिंग प्रेस यूनिट , परिवार और सामाजिक गतिविधियां उसी जिले में सक्रिय हैं। उनकी एकमात्र बेटी फर्रुखाबाद में ही डीपीएस की कक्षा 5 की छात्रा है,यदि यह सच है, तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक गंभीर संस्थागत विफलता है।

अक्षर की बात तो यहां तक है कि उन्हें प्रोडक्ट रिवाल्वर के लाइसेंस का नवीनीकरण इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि उनके ऊपर कुछ फर्जी मुकदमे हैं लेकिन जिला सुरक्षा समिति में हर बार अपनी रिपोर्ट में यह कहा कि उनके पास आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार है हकीकत ऊलट है, उस हथियार का लाइसेंस नवीनीकरण हो ही नहीं सकता शरद कटियार द्वारा लाइसेंस नवीनीकरण की पत्रावली प्रस्तुत की गई थी जिसमें सीसीटीएनएस रिपोर्ट में नॉट रिकमेंडड लिख दिया गया था बाद में जब ज्यादा उठी तो जिलाधिकारी कार्यालय से वह पत्रावली ही गायब कर दी गई।

हाथरस और फर्रुखाबाद—दोनों मामलों में एक समानता साफ दिखती है, खतरे की जानकारी पहले से थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। फर्क सिर्फ इतना है कि हाथरस में परिणाम हत्या के रूप में सामने आया, जबकि फर्रुखाबाद में खतरा अब भी बना हुआ है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि फर्रुखाबाद मामले में सुरक्षा बहाली के लिए वरिष्ठ स्तर से मंत्री, सुरेश कुमार खन्ना, जयवीर सिंह, सांसद मुकेश राजपूत और यहां तक कि जनपद एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा तक पुनर्विचार के संकेत दिए गए। इसके बावजूद जिला स्तर पर स्थिति नहीं बदली। यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, क्योंकि यह केवल निष्क्रियता नहीं, बल्कि संभावित रूप से एक कठोर प्रशासनिक रुख को दर्शाती है।

यदि जिलाधिकारी के स्तर पर ही तथ्यात्मक रिपोर्टिंग संदिग्ध हो, निर्णय पारदर्शी न हों, और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संवेदनशीलता का अभाव दिखे—तो फिर आम नागरिक और पत्रकार किस पर भरोसा करें?

यह समय केवल घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने का है। हाथरस की घटना एक चेतावनी थी—और फर्रुखाबाद का मामला एक परीक्षण। यदि अब भी प्रशासन नहीं जागता, तो यह मान लेना चाहिए कि समस्या कहीं गहरी है।

लोकतंत्र में पत्रकार केवल खबर नहीं लिखता, वह व्यवस्था का आईना होता है। और यदि उस आईने को ही तोड़ने या कमजोर करने की कोशिश की जाएगी, तो सच्चाई भी धुंधली हो जाएगी। अब निर्णय प्रशासन को लेना है—क्या वह हाथरस जैसी घटनाओं से सबक लेगा, या फिर फर्रुखाबाद जैसे मामलों में भी वही चुप्पी दोहराई जाएगी?

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article