प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में टीजीटी/एलटी ग्रेड शिक्षकों की नई भर्तियों को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य योग्यता घोषित कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शैक्षिक (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली-1983 के नियम आठ में वर्णित योग्यताओं के साथ टीईटी उत्तीर्ण होना भी जरूरी होगा।
यह आदेश जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी जयहिंद यादव व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची ने 28 जुलाई 2025 को जारी एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती की पात्रता को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि भर्ती प्रक्रिया में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का उल्लंघन किया गया है।
कोर्ट ने पाया कि लोक सेवा आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि भर्ती किन कक्षाओं के लिए है और किस कैडर के अंतर्गत की जा रही है, जिसे न्यायालय ने गंभीर त्रुटि माना। इस पर कोर्ट ने आयोग को शुद्धिपत्र जारी करने का निर्देश देते हुए स्पष्ट करने को कहा कि यह भर्ती केवल कक्षा 9 और 10 के लिए है।
सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग के अपर निदेशक द्वारा दाखिल हलफनामे में यह स्वीकार किया गया कि प्रदेश में 904 ऐसे विद्यालय हैं जहां कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई होती है। ऐसे में आयोग का यह दावा कि कक्षा 6 से 8 तक कोई रिक्तियां नहीं हैं, न्यायालय को तार्किक नहीं लगा। याची पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि सीटी कैडर को समाप्त कर पहले ही एलटी (टीजीटी) कैडर में समाहित किया जा चुका है, इसलिए टीईटी अनिवार्यता आवश्यक है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों की पात्रता और चयन प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
टीजीटी-एलटी ग्रेड भर्ती में टीईटी अनिवार्य: हाईकोर्ट


