– दोबारा सुनवाई की मांग तेज
ढांका
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चलाए गए ट्रायल को लेकर नया अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा हो गया है। एक प्रमुख ब्रिटिश लॉ फर्म ने इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
लंदन स्थित लॉ फर्म ने बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल को नोटिस भेजकर कहा है कि हसीना के खिलाफ सुनवाई अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं हुई। फर्म ने इस मामले में दो हफ्तों के भीतर जवाब भी मांगा है।
फर्म का कहना है कि 78 वर्षीय हसीना के खिलाफ ट्रायल उनकी अनुपस्थिति में चलाया गया, जो उनके बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी आरोपी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि हसीना को न तो सबूतों तक पर्याप्त पहुंच दी गई और न ही आरोपों की पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध कराई गई। इससे न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
इस मामले में राजनीतिक माहौल को भी संदिग्ध बताया गया है। फर्म के अनुसार, जिस समय यह ट्रायल चला, उस दौरान देश में राजनीतिक तनाव चरम पर था और हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने 17 नवंबर को हसीना को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। उन पर 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने और करीब 1400 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
ब्रिटिश लॉ फर्म ने ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और कुछ सदस्यों के राजनीतिक संबंध होने के कारण निष्पक्षता प्रभावित हुई।
फर्म ने मांग की है कि हसीना की सजा को रद्द किया जाए और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप दोबारा निष्पक्ष सुनवाई कराई जाए। इसके साथ ही अवामी लीग से जुड़े नेताओं और समर्थकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।
इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ रही है। ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों ने भी न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
इन संगठनों का कहना है कि इतनी तेजी से हुई सुनवाई और पारदर्शिता की कमी न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।
गौरतलब है कि 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी और वह भारत आ गई थीं। इसके बाद उनके खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के तहत मामला दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का असर न केवल बांग्लादेश की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि और न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।


