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Wednesday, April 1, 2026

इंतजार नहीं स्वयं को तैयार करने का समय है

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डॉ मनोज कुमार तिवारी
वरिष्ठ परामर्शदाता
एआरटीसी, एसएस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी

बोर्ड परीक्षाएं समाप्त हो गयीं हैं अब रिजल्ट के इंतजार में अधिकांश छात्र- छात्राऐं व अभिभावकों में बैचेनी देखी जा सकती है। लोगों के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इंतजार का समय न केवल लंबा होती है बल्कि बेचैन करने वाला भी होता है।अध्ययनों में पाया गया है कि बोर्ड परीक्षाओं तथा परिणाम घोषित होने के बीच 73% से 81% छात्र अपने परीक्षा परिणाम को लेकर तनाव ग्रस्त रहते हैं। रिजल्ट में क्या होगा सोचकर छात्र तनाव ग्रस्त हो जाते हैं, जबकि यही समय होता है, जब वे रिजल्ट की चिंता छोड़कर भविष्य में उन्हें क्या करना है, कैसे करना, अपने को तैयार करने पर ज्यादा फोकस करना चाहिए जिससे वे बेहतर भविष्य की ओर कदम बढा सकते हैं।
तनाव कारक:-
# असफलता का भय
# उच्च अंक प्राप्त करने का दबाव # भविष्य अनिश्चितता
# दूसरों से अंकों की प्रतिस्पर्धा
# परिवार में उच्च सफलता का दबाव
# सामाजिक दबाव
# अति प्रतिस्पर्धापूर्ण वातावरण
# लगातार इस बात पर विचार करना कि रिजल्ट क्या होगा
# नकारात्मक रिजल्ट का बार-बार विचार आना
# अपने गलत उत्तरों को बार-बार याद करना
# सहपाठियों से लगातार रिजल्ट पर ही चर्चा करते रहना
# सख्त मूल्यांकन का अफवाह
# कैरियर की अनिश्चितता
छात्र करें:-
रिलैक्स होकर उर्जा संग्रह करें:- महीनों की कड़ी मेहनत के बाद शरीर व मन को आराम दें, भरपूर नींद लें, परिजनों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं, अपनी पसंदीदा रिश्तेदारी जाऐं, शहर में रहते हैं तो गांव का सैर करें।
शौक को पुरा करें:- अगर कोई शौक है- डांस, खेल, पेंटिंग, संगीत, कुकिंग या फोटोग्राफी का तो इस समय उपयोग कर इन्हें पुरा करें।
हुनर को बढाऐ, कमजोरी को दूर करें:-
प्रतिस्पर्धा व तुलना भी जीवन का हिस्सा है। प्रतिस्पर्धा में अपनी ताकत तथा कमजोरियों को पहचान करना। अपनी ताकत को और अधिक मजबूत करना तथा कमजोरियों पर काबू पाने के लिए काम करने का यह बहुत ही उत्तम समय है इसके लिये विशेषज्ञ की सहायता ली जा सकती है।
नया कौशल सीखें:- भविष्य के लिए तैयार होने के लिए डिजिटल मार्केटिंग, कंप्यूटर कोडिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग या कोई विदेशी भाषा सीख सकते हैं। जो कैरियर सोचा है उसमें सहायक कौशलों का भी विकास कर सकते हैं।
कैरियर काउंसलिंग:- आगे की पढ़ाई के लिए विषय या कॉलेज का चयन करने का प्रयास करें इसमें मनोवैज्ञानिक से सलाह ले सकते हैं वे आपके रुचि, योग्यता, समय व संसाधनों के अनुसार चयन में सहायता कर सकते हैं।
स्वास्थ्य पर ध्यान:- यह समय अपने स्वास्थ्य में सुधार हेतु उपयोग किया जा सकता है। योग, मेडिटेशन, तैराकी या खेल में शामिल होकर अपनी फिटनेस में सुधार कर सकते हैं।
यात्रा करें:- दोस्तों या परिवार के साथ किसी शांत जगह पर यात्रा पर जाएं। यात्रा से मन शांत होने के साथ नयी जानकारी भी मिलती है।
किताबें पढ़ें:- अपने पाठ्यक्रम से हटकर अपनी मन पसंद की ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ें। रुचि हो तो धार्मिक व आध्यात्मिक पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं इससे मन को शकुन मिलता है।
सीनियर से मार्गदर्शन लें:- अपने से वरिष्ठ सफल छात्रों से इस समय के उपयोग के लिए मार्गदर्शन लें। अपने मन:स्थिति को साझा कर असमंजस को दूर करें।
जूनियर्स की मदद करें:- जो छात्र इस साल बोर्ड की परीक्षा देने वाले हो उन्हें अपने अनुभव साझा करें और उनकी पढ़ाई में मदद करें। किसी की मदद करने से संतुष्टि व संतोष मिलता है।
अभिभावकों को सलाह:-
इस समय आगे निकलने की होड़ ने बच्चों का तनाव स्तर बढ़ा रखा है। कई बच्चों को तो चिकित्सक तक की मदद लेनी पड़ती है। कुछ तनाव व अवसाद के कारण जान देने तक की सोचने लगते हैं। इस समय बच्‍चे अपने 10वीं व 12वीं कक्षा के बोर्ड के रिजल्‍ट का इंतजार कर रहे हैं। जिससे तनाव होना लाजमी है। इस समय अभिभावकों का बच्चों के प्रति सही दृष्टिकोण उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करता है।
बच्चों पर दबाव न डालें:-
बोर्ड रिजल्ट से पहले माता-पिता को अपने बच्चों से ज्यादा अंक लाने के बारे में बात करने से बचना चाहिए। ऐसा करने से छात्र तनावग्रस्त होते हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चे की मेहनत की सराहना करें और परिणाम से ज्यादा उनके प्रयासों व मेहनत पर बात करें।
संवाद बनाए रखें:-
बच्चों से उनकी भावनाओं व चिंताओं के बारे में बात करें। उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि आप हर परिस्थिति में उनके साथ हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चे की आलोचना न करें, उनकी बात सुनें। उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मौका दें।
तुलना न करें:-
बच्चों की तुलना सहपाठियों, भाई-बहनों या पड़ोसियों से न करें। इससे आत्मविश्वास कम होता है। हर बच्चे की अपनी अलग ताकत व कमजोरी होती है। यह समझते हुए उसकी व्यक्तिगत प्रगति पर ध्यान दें।
तनाव प्रबंधन के तरीके सिखाएं:-
बच्चों को ध्यान, गहरी सांस, रिलैक्सेशन अभ्यास, माइंडफुलनेस जैसे तनाव प्रबंधन तरीके सिखने में सहयोग करें। यह उन्हें परिणाम के दबाव से निपटने में मदद करेगा। उनके साथ खेलने, संगीत सुनने या पेंटिंग करने जैसी गतिविधि में शामिल हों।
सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं:-
अभिभावकों को परिणाम के प्रति सकारात्मक व संतुलित दृष्टिकोण रखना चाहिए। बच्चों को यह समझाएं कि बोर्ड रिजल्ट जीवन का अंतिम परिणाम नहीं है बल्कि नई शुरुआत का अवसर है। असफलता को सीखने के अवसर के रूप में प्रस्तुत करें।

बोर्ड परीक्षाओं के खत्म होने और रिजल्ट आने के बीच के समय को छात्र तनावमुक्त होने, नये कौशलों को सीखने तथा भविष्य की योजना बनाने के अवसर के रूप में उपयोग कर सकते हैं। रिजल्ट की चिंता में समय बर्बाद न करें और न ही दूसरों से अपने रिजल्ट की तुलना करें। इस समय का उपयोग खुद को बेहतर बनाने के लिए करें। सभी को समझना चाहिए कि परीक्षा परिणाम जीवन का केवल एक पडाव है अंतिम लक्ष्य नहीं।

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