औरैया
जनपद के मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। अस्पताल प्रशासन ने बढ़ती ओपीडी और मरीजों की समस्याओं को देखते हुए सभी स्वास्थ्य सेवाओं को नई बिल्डिंग में शिफ्ट करने की तैयारी तेज कर दी है। इस फैसले के लागू होने के बाद मरीजों को जांच, भर्ती और उपचार के लिए अलग-अलग भवनों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
मौजूदा समय में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी 3 हजार के पार पहुंच चुकी है, जबकि 420 बेड वाले इस अस्पताल में रोजाना 300 से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं। इसके बावजूद स्टाफ की कमी और व्यवस्थाओं के पूर्ण रूप से स्थानांतरित न होने के कारण अभी तक वार्ड, जच्चा-बच्चा विभाग, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं पुरानी बिल्डिंग में ही संचालित हो रही हैं।
इस स्थिति के चलते मरीजों को ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के बाद जांच के लिए पुरानी बिल्डिंग तक जाना पड़ता है, जहां भीड़ और अव्यवस्था के कारण उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है। जांच के बाद रिपोर्ट लेकर वापस ओपीडी आने तक कई बार दोपहर बीत जाती है, जिससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कई बार उन्हें अगले दिन फिर से अस्पताल आना पड़ता है।
इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने नई बिल्डिंग में सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। नई बिल्डिंग के पास ऑक्सीजन प्लांट तैयार हो चुका है और उसका कनेक्शन किया जा रहा है। इसके पूरा होते ही पुरानी बिल्डिंगों में संचालित सभी सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से नई बिल्डिंग में स्थानांतरित किया जाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि अप्रैल माह के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
वहीं, मेडिकल कॉलेज परिसर में स्थित महिला अस्पताल की बिल्डिंग में भी मेंटेनेंस का कार्य प्रस्तावित है। यहां सीवरेज लाइन जाम होने के कारण वार्ड और जच्चा-बच्चा विभाग में दिक्कतें आ रही हैं। शासन से लगभग दो करोड़ रुपये के बजट से मरम्मत कार्य कराया जाएगा, जिसके लिए वहां की सेवाओं को भी अस्थायी रूप से नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि नई बिल्डिंग में सभी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं शुरू करने की तैयारी चल रही है और ऑक्सीजन प्लांट को जोड़ने का कार्य अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि जल्द ही मरीजों को एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे इलाज की प्रक्रिया सरल और सुविधाजनक हो सकेगी।
इस पहल से न केवल मरीजों की परेशानी कम होगी, बल्कि अस्पताल की कार्यप्रणाली भी अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगी।


