– गैंगवार का शक; पुलिस ने शुरू की व्यापक जांच
ओटावा
कनाडा में एक बार फिर हिंसक वारदात ने भारतीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। सरे शहर में भारतीय मूल के एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।
मृतक की पहचान 27 वर्षीय जसमन सेखों के रूप में हुई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस हत्या के पीछे संगठित अपराध और गैंगवार की आशंका जताई जा रही है।
घटना सरे के सुलिवन हाइट्स स्थित एक टाउनहाउस कॉम्प्लेक्स में हुई। बताया जा रहा है कि हमलावर पहले से ही युवक की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे।
चश्मदीदों के मुताबिक, एक काली एसयूवी ने जसमन का पीछा किया। कुछ ही देर बाद वाहन से दो हमलावर बाहर निकले और उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।
हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि जसमन मौके पर ही गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस के पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी है और संदिग्धों की तलाश जारी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृतक का नाम पहले भी पुलिस रिकॉर्ड में आ चुका था। उस पर कथित तौर पर मादक पदार्थों के कारोबार से जुड़े होने का संदेह जताया गया था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वारदात पूरी तरह सुनियोजित लग रही है। जिस तरह से हमलावरों ने पीछा कर हमला किया, उससे पेशेवर अपराधियों की भूमिका की आशंका मजबूत होती है।
घटनास्थल के नजदीक पुलिस को एक जली हुई कार भी बरामद हुई है। आशंका जताई जा रही है कि हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के बाद सबूत मिटाने के लिए इस वाहन का इस्तेमाल किया होगा।
फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके।
पुलिस के अनुसार, सरे शहर में पिछले 48 घंटों के भीतर गोलीबारी की यह चौथी घटना है। लगातार हो रही ऐसी वारदातों ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा के कुछ हिस्सों में सक्रिय गैंग नेटवर्क के बीच आपसी संघर्ष बढ़ता जा रहा है, जिसका असर आम नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है।
इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और संगठित अपराध पर नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर प्रवासी समुदायों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।


