कानपुर। शहर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के बड़े सिंडिकेट का खुलासा होने से स्वास्थ्य तंत्र में हड़कंप मच गया है। पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार इस रैकेट को पकड़ने के लिए पिछले एक वर्ष से लगातार ट्रेसिंग की जा रही थी, जिसके बाद अब पूरे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है।
जांच में सामने आया कि एम्बुलेंस चालक शिवम इस रैकेट का अहम किरदार था, जो महज 8वीं पास होने के बावजूद खुद को डॉक्टर बताकर घूमता था और पूरे नेटवर्क को जोड़ने का काम करता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही इस बड़े सिंडिकेट की परतें खुलनी शुरू हुईं।
पुलिस के मुताबिक, यह रैकेट कई अस्पतालों से जुड़ा हुआ था। पहले से सीज हो चुके आरोही हॉस्पिटल के बाद अब आहूजा हॉस्पिटल का लिंक भी सामने आया है। साथ ही मेरठ के एक डॉक्टर अफजाल द्वारा डोनर और रिसीवर के बीच डील कराए जाने की बात भी सामने आई है। इसके लिए टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कुछ अस्पतालों में सर्जरी वाले दिन स्टाफ को छुट्टी पर भेज दिया जाता था, ताकि अवैध ट्रांसप्लांट बिना किसी बाधा के किया जा सके। खास तौर पर आहूजा हॉस्पिटल में इस तरह की गतिविधियों के संकेत मिले हैं।
पुलिस के अनुसार, कानपुर में अब तक 40 से 50 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इन सर्जरी को डॉ. रोहित अपनी टीम के साथ अंजाम देता था। इस मामले में डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और डॉ. प्रीति आहूजा को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा प्रिय हॉस्पिटल के मालिक नरेंद्र सिंह, राम प्रकाश कुशवाहा और राजेश कुमार को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार कर रहा था। अब पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और इसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट का भंडाफोड़, फर्जी डॉक्टर से लेकर बड़े अस्पतालों तक फैला करोड़ों का रैकेट


