लखनऊ। प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कालाबाजारी व अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने व्यापक स्तर पर सख्त अभियान चलाया हुआ है। इसी कड़ी में अब तक 17 हजार से अधिक छापेमारी की कार्रवाई की जा चुकी है, जिससे तेल माफियाओं और अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न जिलों में खाद्य एवं रसद विभाग, आपूर्ति विभाग और संबंधित एजेंसियों की संयुक्त टीमों द्वारा लगातार निरीक्षण और छापेमारी की जा रही है। इस दौरान पेट्रोल पंपों पर माप-तौल, गुणवत्ता और स्टॉक की जांच की जा रही है, वहीं एलपीजी गैस एजेंसियों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि उपभोक्ताओं के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी न हो।
अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान कई स्थानों पर अनियमितताएं पाई गई हैं, जिनमें कम मात्रा में ईंधन देना, मिलावट, अवैध भंडारण और घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग शामिल है। ऐसे मामलों में संबंधित पंप संचालकों और एजेंसियों के खिलाफ जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और एफआईआर जैसी सख्त कार्रवाई की गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम जनता को शुद्ध और निर्धारित मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। इसके लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया गया है और अधिकारियों को नियमित रूप से जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागीय अधिकारियों ने यह भी कहा कि आगे भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार की इस सख्ती से उपभोक्ताओं में भरोसा बढ़ा है, वहीं अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
पेट्रोल-डीजल व एलपीजी पर सरकार की सख्त निगरानी, अब तक 17 हजार से ज्यादा छापे


