लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने झारखंड स्थित पछवारा साउथ कोल खदान के विकास के लिए ₹2242.90 करोड़ की लागत को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से भविष्य में प्रदेश में बिजली उत्पादन की लागत घटेगी, जिससे आम जनता को सस्ती बिजली मिलने की उम्मीद है।
यह कोयला खदान परियोजना कानपुर के घाटमपुर में प्रस्तावित तापीय विद्युत परियोजना को कोयला उपलब्ध कराएगी। इससे बिजली उत्पादन में उपयोग होने वाले ईंधन की लागत कम होगी और प्रति यूनिट बिजली की कीमत में लगभग ₹1 तक की कमी आने का अनुमान है। सरकार के इस कदम को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम माना जा रहा है।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और एनएलसी इंडिया लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित की जा रही है। परियोजना की कुल लागत का लगभग 70 प्रतिशत यानी ₹1570.03 करोड़ ऋण के माध्यम से जुटाया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत राशि अंशपूंजी के रूप में लगाई जाएगी। इसमें उत्पादन निगम की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के अनुसार ₹329.71 करोड़ का योगदान शामिल होगा।
सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद प्रदेश में बिजली उत्पादन की लागत नियंत्रित होगी और इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। साथ ही, इससे औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा आपूर्ति अधिक स्थिर हो सकेगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, कोयला खदान से सीधे आपूर्ति होने पर परिवहन लागत में भी कमी आएगी, जिससे बिजली कंपनियों पर आर्थिक बोझ घटेगा। इसके अलावा, यह परियोजना राज्य के ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योगी सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब महंगाई और ऊर्जा लागत को लेकर आम जनता पहले से ही दबाव में है। ऐसे में सस्ती बिजली की दिशा में उठाया गया यह कदम प्रदेश के लोगों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।


