पेरिस
फ्रांस ने अपनी सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश के नए परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत का नाम “फ्रांस लिब्रे” घोषित किया है।
यह अत्याधुनिक युद्धपोत फ्रांस की नौसैनिक क्षमता को और मजबूत करेगा। इसे खास तौर पर भविष्य की चुनौतियों और वैश्विक रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, यह विमानवाहक पोत वर्ष 2038 तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके निर्माण में आधुनिक तकनीक और उच्च सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
“फ्रांस लिब्रे” में लगभग 30 राफेल लड़ाकू विमान तैनात किए जा सकेंगे, जो इसे युद्ध के दौरान बेहद घातक और प्रभावी बनाएंगे।
इसके अलावा, इस विशाल युद्धपोत पर करीब 2000 सैनिकों के रहने और संचालन की व्यवस्था होगी, जिससे यह लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकेगा।
इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 10 अरब यूरो बताई जा रही है, जो इसे फ्रांस के सबसे महंगे रक्षा प्रोजेक्ट्स में शामिल करती है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि “फ्रांस लिब्रे” नाम देश की आजादी, संप्रभुता और सैन्य ताकत का प्रतीक है। यह नाम ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व भी रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विमानवाहक पोत फ्रांस को वैश्विक स्तर पर और मजबूत सैन्य उपस्थिति दर्ज कराने में मदद करेगा।
खासतौर पर मध्य-पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में इसकी तैनाती फ्रांस की रणनीतिक पकड़ को और मजबूत कर सकती है।
इसके जरिए फ्रांस न केवल अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका को भी और प्रभावी बना सकेगा।
कुल मिलाकर, “फ्रांस लिब्रे” फ्रांस की रक्षा नीति में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है, जो आने वाले दशकों में उसकी सैन्य शक्ति का अहम आधार बनेगा।


