– डोनाल्ड ट्रंप बोले—कतर पर फिर हमला हुआ तो ऊर्जा ढांचा कर देंगे तबाह
तेहरान
पश्चिम एशिया में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है। ईरान और उसके विरोधियों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
ईरान की सेना के प्रमुख अंग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े तेल और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है। इन हमलों को “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4” का हिस्सा बताया गया है।
आईआरजीसी के मुताबिक, यह कार्रवाई हाल ही में ईरान पर हुए हमलों और उसके खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब की मौत के जवाब में की गई है। ईरान ने इसे बदले की कार्रवाई करार दिया है।
ईरान का कहना है कि उसका शुरुआती उद्देश्य पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना नहीं था, लेकिन जब उसके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया गया, तो उसे जवाब देना पड़ा।
आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने इस्राइल के भीतर करीब 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें रिशोन लेजियन, रामला, लोद, ईलात और तेल अवीव के आसपास के इलाके शामिल हैं।
इन हमलों में कई वारहेड वाली मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।
ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर फिर हमला हुआ, तो वह दुश्मनों के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर देगा।
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर कतर की ऊर्जा सुविधाओं को दोबारा निशाना बनाया गया, तो अमेरिका ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को तबाह कर देगा।
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि कतर या अमेरिका को इन हमलों की पहले से कोई जानकारी नहीं थी और इसे एक गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम के चलते वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक और सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है।


