लखनऊ: राजधानी इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत से जूझ रही है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे हैं कि उपभोक्ताओं को सुबह 6 बजे से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। कई क्षेत्रों में मैनुअल बुकिंग की प्रक्रिया में दिक्कतें आने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
गैस की कमी के चलते बड़ी संख्या में लोग मजबूर होकर कोयले और लकड़ी के चूल्हों का सहारा ले रहे हैं, जिससे न केवल असुविधा हो रही है बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ने लगी हैं। घरेलू रसोई के साथ-साथ इस संकट का सीधा असर होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर भी पड़ा है। शहर के कई छोटे-बड़े होटल और ढाबे गैस न मिलने के कारण बंद पड़े हैं या सीमित रूप से संचालित हो रहे हैं।
व्यापारिक संगठनों के अनुसार, इस संकट से करीब 15 हजार से अधिक दुकानों और प्रतिष्ठानों पर असर पड़ा है। खानपान से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण उनका दैनिक व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
इसी बीच गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के भी आरोप सामने आ रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि जहां एक ओर उन्हें एजेंसियों पर घंटों इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर ऊंचे दामों पर गैस की अवैध बिक्री हो रही है। इसको लेकर प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति में आई अस्थायी बाधाओं को जल्द दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाया जाए। साथ ही कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
गैस संकट के चलते शहर में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लोग जल्द से जल्द स्थिति सामान्य होने की उम्मीद कर रहे हैं।
गैस संकट गहराया: सुबह 6 बजे से लंबी लाइनें, कालाबाजारी के आरोप, हजारों कारोबार प्रभावित


