– राजेपुर थाना पुलिस नें खाकी के इक़बाल पर ही खड़ा किया प्रश्न
– बिना जाँच लिख लिया मुकदमा
– पुलिस की बड़ी चूक, मृतक को बना दिया आरोपी
फर्रुखाबाद। जनपद के थाना राजेपुर क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के आरोप में दर्ज किए गए मुकदमे में पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को भी आरोपी बना दिया, जिसकी मौत करीब 10 वर्ष पहले ही हो चुकी थी।
इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया और एफआईआर दर्ज करने की कार्यशैली को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग इसे पुलिस की बड़ी लापरवाही मान रहे हैं।
जानकारी के अनुसार 13 मार्च की शाम करीब 7 बजे अनुज पुत्र राजकुमार निवासी गांधी ने थाना राजेपुर में तहरीर दी। तहरीर में आरोप लगाया गया कि राममूर्ति, विजय, अभिषेक और विनोद निवासी गांधी ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
तहरीर के आधार पर थाना राजेपुर पुलिस ने बिना प्राथमिक जांच किए सभी नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों में शामिल विनोद की मृत्यु लगभग 10 वर्ष पहले 4 फरवरी 2016 को ही हो चुकी है।
इसके बावजूद पुलिस ने मृत व्यक्ति को भी आरोपी बनाकर मुकदमा दर्ज कर लिया। यह खुलासा होने के बाद पूरे क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
परिजनों का आरोप – पैसे लेकर किया गया फर्जी मुकदमा
मृतक विनोद के परिजनों का आरोप है कि पूरे मामले में पैसे के लेन-देन के बाद फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया है। उनका कहना है कि मृतक के बेटे अभिषेक को भी जानबूझकर इस विवाद में फंसाने की कोशिश की जा रही है। परिजनों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कानूनी जानकारों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों द्वारा कई बार स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि एफआईआर दर्ज करते समय पुलिस को प्राथमिक तथ्यों का सत्यापन करना चाहिए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को गलत तरीके से मुकदमे में न फंसाया जाए।
कई मामलों में अदालतें यह भी कह चुकी हैं कि मृत व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना न केवल गंभीर लापरवाही है बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग भी माना जा सकता है। यदि विवेचना के दौरान यह साबित होता है कि जानबूझकर गलत नाम शामिल किए गए हैं, तो ऐसे मामलों में संबंधित लोगों पर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई भी हो सकती है।
इस पूरे मामले पर थाना राजेपुर के प्रभारी निरीक्षक सुदेश कुमार विश्वकर्मा का कहना है कि मुकदमा शिकायतकर्ता की तहरीर के आधार पर दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि विवेचना के दौरान यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सही है और कौन गलत।
हालांकि 10 साल पहले मृत व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि जनपद के उच्चाधिकारी इस मामले को कितना गंभीरता से लेते हैं और जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।


