मुरादाबाद: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों तक दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में गैस सिलिंडर की कमी और बढ़ती लागत के कारण पारंपरिक ईंधन के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। हालत यह है कि जो उपला पहले तीन रुपये में मिल जाता था, अब उसकी कीमत बढ़कर पांच से छह रुपये तक पहुंच गई है।
शहर में गैस और कामर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण होटल, रेस्टोरेंट और छोटे ढाबों ने अब कोयला, लकड़ी और उपलों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इससे इन ईंधनों की मांग अचानक बढ़ गई और कीमतों में तेजी आ गई।
स्थानीय दुकानदारों के अनुसार पिछले सप्ताह तक एक उपला लगभग तीन रुपये का मिल रहा था, लेकिन अब कई जगहों पर इसकी कीमत पांच रुपये हो गई है। कुछ स्थानों पर यह छह रुपये तक में बिक रहा है। उपलों की सबसे ज्यादा मांग सड़क किनारे चाय, पकौड़ी और नाश्ते के ठेले लगाने वाले छोटे दुकानदारों के बीच देखी जा रही है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर लकड़ी और कोयले पर भी पड़ा है। पहले जो लकड़ी लगभग दस रुपये प्रति किलो मिलती थी, उसका भाव अब बढ़कर करीब तेरह रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं अलग-अलग किस्म के कोयले की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
ढाबों और छोटे भोजनालयों में भी अब गैस की जगह देसी चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ने लगा है। कई हाईवे किनारे स्थित ढाबों ने खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले की भट्टियां फिर से जलानी शुरू कर दी हैं।
शहर के एक ठेला व्यापारी राहुल कश्यप बताते हैं कि उन्हें कई दिनों से गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा है। मजबूरी में अब अंगीठी में उपले या लकड़ी जलाकर काम चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अब तो उपला भी महंगा हो गया है और एक-एक उपले के लिए पांच रुपये तक देने पड़ रहे हैं।
कुछ दुकानदारों का कहना है कि उपले आसानी से मिल भी नहीं रहे हैं और कई लोग इन्हें आसपास के गांवों से लाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकबड़ा इलाके के रहने वाले सद्दाम का कहना है कि बड़े होटल वाले तो कोयला खरीद सकते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए उपला और लकड़ी ही सहारा है।
व्यापारियों के अनुसार फिलहाल शहर में ईंधन के प्रमुख दाम इस प्रकार हैं—
उपला: लगभग पांच रुपये प्रति पीस
लकड़ी: करीब तेरह रुपये प्रति किलो
लकड़ी वाला कोयला: लगभग पैंतीस रुपये प्रति किलो
नेट कोक: करीब चालीस रुपये प्रति किलो
हार्डकोक: लगभग अठारह रुपये प्रति किलो
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे छोटे व्यापारियों और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।


