अर्चित शर्मा फिरोजाबाद
फिरोजाबाद। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) धनुपुरा में तैनात बीसीपीएम रफत नाज की अनुपस्थिति का मामला करीब ढाई माह बाद भी ठंडे बस्ते में नजर आ रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निरीक्षण में लापरवाही सामने आने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट विभागीय कार्रवाई नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार 23 दिसंबर 2025 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामबदन राम ने सीएचसी धनुपुरा का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान बीसीपीएम रफत नाज लगभग एक माह से ड्यूटी से अनुपस्थित पाई गई थीं। इस तथ्य का उल्लेख निरीक्षण आख्या में भी दर्ज किया गया था।
सामान्यतः निरीक्षण में किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने आने पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है, लेकिन इस मामले में अब तक ऐसी कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि निरीक्षण में दर्ज लापरवाही के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती है तो इससे विभागीय अनुशासन और जवाबदेही दोनों प्रभावित होते हैं।
इस मामले को लेकर यह चर्चा भी है कि शासन द्वारा घोषित जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद यदि निरीक्षण में सामने आई लापरवाही पर कार्रवाई नहीं होती है तो इससे व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
तथ्य एक नजर में
23 दिसंबर 2025 को सीएमओ ने किया था सीएचसी धनुपुरा का निरीक्षण
निरीक्षण में बीसीपीएम रफत नाज करीब एक माह से अनुपस्थित मिलीं
अनुपस्थिति का जिक्र निरीक्षण आख्या में दर्ज
करीब ढाई माह बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं
सवाल जो जवाब मांग रहे
निरीक्षण रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी?
क्या निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है?
क्या जीरो टॉलरेंस नीति का पालन जमीनी स्तर पर हो रहा है?


