– सीएम योगी से पीएम मोदी तक भरोसे का चेहरा, अगली बड़ी जिम्मेदारी के संकेत
लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजनीति में साफ-सुथरी छवि और पारदर्शिता के लिए पहचाने जाने वाले भाजपा नेता सुनील दत्त द्विवेदी को प्रदेश सरकार ने दूसरी बार फिर सौपे गए महत्वपूर्ण दायित्व का सफलतम निर्वहन कर रहे हैँ । उत्तर प्रदेश विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति के सभापति के रूप में उनका दूसरा कार्यकाल जारी है। इसे उनकी काबिलियत, ईमानदारी और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता की बड़ी स्वीकृति माना जा रहा है।
फर्रुखाबाद सदर विधानसभा से लोकप्रिय विधायक के रूप में करीब नौ वर्षों से उत्तर प्रदेश विधानसभा में सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे सुनील दत्त द्विवेदी ने सदन के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई है। उनकी कार्यशैली को लेकर कहा जाता है कि वे तथ्यों और पारदर्शिता के आधार पर निर्णय लेने में विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि वे योगी आदित्यनाथ के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं और केंद्र नेतृत्व में भी उनकी सकारात्मक छवि है, जहां नरेंद्र मोदी की पारदर्शी शासन व्यवस्था के अनुरूप कार्यशैली को प्राथमिकता दी जाती है।
सुनील दत्त द्विवेदी एक सशक्त राजनीतिक विरासत से आते हैं। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व ऊर्जा मंत्री स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी और पूर्व कैबिनेट मंत्री रहीं स्वर्गीय प्रभा द्विवेदी के बड़े पुत्र हैं। पारिवारिक राजनीतिक संस्कारों को आत्मसात करते हुए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है और बेदाग छवि के साथ सक्रिय राजनीति में अपनी जगह मजबूत की है।
सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति जैसे अहम मंच पर दोबारा नियुक्ति यह दर्शाती है कि सरकार उनकी कार्यक्षमता और निगरानी क्षमता से संतुष्ट है। इस समिति की भूमिका प्रदेश के उपक्रमों और निगमों की कार्यप्रणाली की समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दूसरा कार्यकाल भविष्य में और बड़ी जिम्मेदारी का संकेत हो सकता है। संगठन और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने में उनकी भूमिका को सकारात्मक माना जा रहा है।
जहां राजनीति में अक्सर आरोप-प्रत्यारोप और विवाद सुर्खियां बनते हैं, वहीं सुनील दत्त द्विवेदी की शांत, संतुलित और पारदर्शी कार्यशैली उन्हें अलग पहचान देती है। दूसरा कार्यकाल इस बात का प्रमाण है कि ईमानदार और साफ-सुथरी राजनीति की आज भी कद्र है — और आने वाले समय में उनकी भूमिका और व्यापक हो सकती है।






