नई दिल्ली| पश्चिम एशिया में ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों के बाद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाएं तेज हो गई हैं, जिससे कई देशों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। संघर्ष अब ईरान-इस्राइल की सीमाओं से आगे बढ़कर खाड़ी देशों और लेबनान तक पहुंच गया है।
ईरानी मीडिया के अनुसार कुवैत में अमेरिकी सेना का एक F-15 फाइटर जेट क्रैश हो गया। विमान में हवा में ही आग लगने का वीडियो सामने आया है। हालांकि पायलट पैराशूट के जरिए सुरक्षित बाहर निकल गया। अमेरिका और कुवैत की ओर से इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसी बीच कुवैत में अमेरिकी दूतावास के पास धुएं का गुबार उठता देखा गया और एयर रैड सायरन बजाए गए।
कतार ने अपने हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिसके चलते कतर एयरवस ने सभी उड़ानें स्थगित कर दी हैं। एयरलाइन ने कहा है कि सुरक्षा स्थिति सामान्य होने पर संचालन फिर से शुरू किया जाएगा। दोहा में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, वहीं संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में भी विस्फोट की खबरें सामने आई हैं।
इस्राइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार ‘ऑपरेशन रॉरिंग लायन’ की शुरुआत से अब तक 777 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया है। इनमें चार की हालत गंभीर बताई गई है, जबकि कई अन्य मध्यम और सामान्य स्थिति में हैं। इस्राइली सेना ने पुष्टि की है कि ईरान की ओर से फिर मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें वायु रक्षा प्रणाली द्वारा रोका जा रहा है। नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
ईरान के सनंदज और कर्मानशाह शहरों में भीषण हमलों की खबर है। सनंदज में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि कई रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। कर्मानशाह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास भारी धुएं के बादल देखे गए।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस्राइली हवाई हमलों में 31 लोगों की मौत और 149 लोग घायल हुए हैं। हालात को देखते हुए बहरीन में एयर रैड अलर्ट जारी कर शेख खलीफा बिन सलमान ब्रिज को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।
ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने अमेरिका की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को ‘इस्राइल फर्स्ट’ में बदल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका के साथ किसी भी समझौते के पक्ष में नहीं है और आत्मरक्षा जारी रखेगा।
साइप्रस स्थित ब्रिटिश एयरबेस राफ आक्रोटीरी पर ड्रोन हमले की पुष्टि की गई है, जबकि बगदाद में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने का दावा शिया मिलिशिया समूह ने किया है।
तेहरान, दोहा, कुवैत सिटी और अबू धाबी समेत कई शहरों में लगातार सायरन और धमाकों की आवाजों ने नागरिकों में भय का माहौल बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल संघर्ष के और तेज होने की आशंका बनी हुई है।
अमेरिका से वार्ता पर पूर्ण विराम: ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी का सख्त संदेश
नई दिल्लीl पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत या समझौते की संभावना से साफ इनकार कर दिया है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट कहा कि तेहरान संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ किसी भी वार्ता या नेगोशिएशन की मेज पर नहीं बैठेगा और अपनी नीतियों पर दृढ़ रहेगा।
लारिजानी का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी मीडिया में वार्ता को लेकर अटकलें तेज थीं। अमेरिकी अखबार द वाल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद लारिजानी ने ओमानी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ बातचीत की पहल की थी। हालांकि ईरान ने इन खबरों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि मौजूदा हालात में किसी भी तरह की कूटनीतिक पहल नहीं की जाएगी।
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान से क्षेत्र में कूटनीतिक रास्ते फिलहाल और जटिल हो सकते हैं, जबकि सैन्य तनाव पहले से ही चरम पर है।
ईरान का दावा: कुवैत में अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान मार गिराया
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने दावा किया है कि कुवैत में अमेरिकी वायुसेना का एक F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान मार गिराया गया है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विमान क्रैश हो गया और उससे जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें आसमान में आग की लपटों के बीच विमान को गिरते हुए दिखाया जा रहा है।
रिपोर्ट्स में कहा गया है कि घटना कुवैत के हवाई क्षेत्र में हुई, जहां हाल के दिनों में मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर अलर्ट जारी है। हालांकि इस दावे की अभी तक अमेरिका या कुवैत की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अमेरिकी रक्षा विभाग की तरफ से भी इस संबंध में कोई बयान सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि बेहद कठिन है और दोनों पक्षों की ओर से सूचना युद्ध भी जारी है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव और गहराने की आशंका बढ़ सकती है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है।


