जालौन| कस्बा डकोर निवासी भानुप्रताप और उनकी पत्नी भूरी देवी इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। परिवार की माली हालत कमजोर होने के कारण दो बच्चों के बाद वर्ष 2023 में पत्नी की नसबंदी कराई गई थी, लेकिन ऑपरेशन के आठ माह बाद ही तीसरे पुत्र के जन्म ने परिवार को और कठिन परिस्थितियों में ला खड़ा किया है। अब दंपति मुआवजे की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिल सकी है।
भानुप्रताप ने बताया कि 29 दिसंबर 2023 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, डकोर में उनकी पत्नी का नसबंदी ऑपरेशन कराया गया था। इसके बावजूद 29 अगस्त 2024 को भूरी देवी ने एक पुत्र को जन्म दिया। उनके अनुसार, ऑपरेशन सफल न होने की शिकायत उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से लेकर मंत्रालय स्तर तक की थी। 28 जून 2025 को ऑनलाइन आवेदन भी किया, लेकिन अब तक किसी प्रकार की अनुदान राशि स्वीकृत नहीं हुई।
भानुप्रताप का कहना है कि वह मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पहले से दो पुत्र अमित कुमार (6 वर्ष) और बृजभान हैं। तीसरे बच्चे अंश के जन्म के बाद परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि सीमित आय में तीन बच्चों की परवरिश करना बेहद कठिन हो रहा है।
भूरी देवी ने बताया कि ऑपरेशन के बाद से उनके पेट में लगातार दर्द बना रहता है और उनका निजी चिकित्सक से इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक तंगी के बीच इलाज और बच्चों की देखभाल दोनों करना मुश्किल हो गया है।
इस संबंध में जालौन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि नसबंदी ऑपरेशन में एक से दो प्रतिशत तक असफलता की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि यह प्रकरण जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था तथा आगे लखनऊ स्तर पर भी भेजा गया, जहां से मामले में दंपति को अपात्र घोषित किया गया है।
अब पीड़ित दंपति ने पुनः जिलाधिकारी से गुहार लगाते हुए आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने की मांग की है, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें।
नसबंदी के आठ माह बाद जन्मा तीसरा पुत्र, मुआवजे को लेकर भटक रहा डकोर का गरीब परिवार


