आज का युवा तेजी से फिटनेस, ऊर्जा और बेहतर परफॉर्मेंस की ओर आकर्षित हो रहा है। जिम कल्चर, बॉडी इमेज का दबाव और सोशल मीडिया पर दिखने वाले “इंस्टेंट रिजल्ट” के दावे शिलाजीत जैसे उत्पादों को युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना रहे हैं। “100% प्योर हिमालयन शिलाजीत”, “कुछ ही दिनों में फर्क”, “नेचुरल टेस्टोस्टेरोन बूस्टर” जैसे विज्ञापन युवाओं का विश्वास जीत रहे हैं। लेकिन क्या हर दावा सच होता है? यह समझना जरूरी है।
शिलाजीत एक प्राकृतिक खनिज पदार्थ है, जो मुख्य रूप से हिमालय की चट्टानों से निकलता है। आयुर्वेद में इसे शक्ति और ऊर्जा बढ़ाने वाला रसायन माना गया है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह शरीर को ताकत देता है, थकान कम करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है और पुरुषों में हार्मोन संतुलन में मदद कर सकता है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में भी सीमित स्तर पर ऊर्जा और टेस्टोस्टेरोन सुधार की बात सामने आई है, लेकिन ये परिणाम सभी पर समान रूप से लागू हों, यह जरूरी नहीं है।
युवाओं में इसके प्रति बढ़ते विश्वास का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया है। फिटनेस इन्फ्लुएंसर, रील्स और प्रमोशनल वीडियो इसे “चमत्कारी” तरीके से प्रस्तुत करते हैं। तेज परिणाम की चाह रखने वाला युवा वर्ग इन दावों से प्रभावित हो जाता है। “नेचुरल” और “आयुर्वेदिक” शब्द भरोसा पैदा करते हैं, लेकिन हर उत्पाद की गुणवत्ता समान नहीं होती।
सबसे बड़ी चिंता मिलावटी और नकली उत्पादों की है। बाजार में कई ऐसे ब्रांड मौजूद हैं जिनकी शुद्धता प्रमाणित नहीं होती। गलत या अधिक मात्रा में सेवन से हार्मोनल असंतुलन, ब्लड प्रेशर की समस्या या अन्य स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह शिलाजीत का सेवन नहीं करना चाहिए।
स्वास्थ्य के मामले में शॉर्टकट खतरनाक साबित हो सकते हैं। शिलाजीत सहायक हो सकता है, लेकिन यह मेहनत, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद का विकल्प नहीं है। सोशल मीडिया के आकर्षक विज्ञापनों के प्रभाव में आकर निर्णय लेने से पहले जागरूकता और विशेषज्ञ सलाह जरूरी है।
युवाओं को चाहिए कि वे ट्रेंड नहीं, तथ्य को महत्व दें। शरीर कोई प्रयोगशाला नहीं है जहां हर नए उत्पाद को बिना जांच परखा जाए। सही जानकारी, संतुलन और सावधानी ही स्वस्थ जीवन की असली कुंजी है।
शिलाजीत के फायदे और सोशल मीडिया के आकर्षक विज्ञापनों से सावधानी


