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Tuesday, February 24, 2026

शाहजहांपुर के पत्रकार का आरोप : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को फंसाने के लिए बनाया गया दबाव

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वाराणसी| केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में चल रहे शंकराचार्य प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है।शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर की अर्जी देने वाले आशुतोष पांडेय पर गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। पत्रकार ने दावा किया है कि उन्हें फोन कर शंकराचार्य के विरुद्ध झूठा और गंभीर आपराधिक आरोप लगाने के लिए दबाव डाला गया तथा आर्थिक सहयोग का प्रलोभन भी दिया गया।
रमाशंकर दीक्षित ने बताया कि आशुतोष पांडेय ने उनसे संपर्क कर कहा कि वे यह आरोप सार्वजनिक रूप से लगाएं कि बद्रीनाथ धाम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक नाबालिग बच्ची का यौन शोषण किया था। पत्रकार के अनुसार, उन्हें आश्वासन दिया गया कि यदि वे यह आरोप लगाते हैं तो उनका “आर्थिक सहयोग” किया जाएगा। दीक्षित ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव को तुरंत अस्वीकार कर दिया। उनका कहना है कि उनके पिता दंडी संन्यासी थे और ऐसे में वे अपने संस्कारों और अंतरात्मा के विरुद्ध जाकर किसी संत पर झूठा आरोप नहीं लगा सकते।
दीक्षित ने यह भी आरोप लगाया कि उनके इनकार करने पर आशुतोष पांडेय ने अप्रत्यक्ष रूप से धमकी दी और कहा कि यदि वे सहयोग नहीं करेंगे तो “और रास्ते” अपनाए जाएंगे। पत्रकार ने कहा कि वे सच के साथ खड़े हैं और किसी भी प्रकार की जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वे अपने दावों के समर्थन में संबंधित कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्य भी उपलब्ध कराने को तैयार हैं।
उधर, केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में पत्रकारों से वार्ता करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि उनके विरुद्ध एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है ताकि उनकी छवि को धूमिल किया जा सके। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस के बजाय किसी गैर भाजपा शासित राज्य की पुलिस या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास सर्वोपरि है और यदि जांच निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से होगी तो सच्चाई स्वयं सामने आ जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्तर की जांच से नहीं डरते और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। स्वामी ने यह भी कहा कि झूठे आरोप लगाकर संत समाज को बदनाम करने की प्रवृत्ति चिंताजनक है और ऐसे तत्वों को बेनकाब किया जाना चाहिए

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