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Monday, February 23, 2026

कथित यौन शोषण प्रकरण में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार, बोले– झूठा आरोप गढ़ा गया, निष्पक्ष जांच हो

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वाराणसी: ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwarananda) सरस्वती ने प्रयागराज माघ मेले (Prayagraj Magh Mela) में दर्ज कराए गए कथित यौन शोषण के मामले में सोमवार को तीखा बयान देते हुए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनके विरुद्ध कोई आरोप लगा है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, वह हर स्तर पर पुलिस को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इसे “गढ़ी गई कहानी” बताते हुए कहा कि उन पर झूठा कलंक लगाया गया है, जिसका शीघ्र निस्तारण होना चाहिए।

केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि जनता का उत्तर प्रदेश पुलिस पर भरोसा कमजोर हुआ है, इसलिए उनके विरुद्ध लगे आरोपों की जांच किसी गैर-भाजपा शासित राज्य की पुलिस से कराई जाए, ताकि निष्पक्षता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं है, क्योंकि आरोप निराधार और असत्य हैं।

गौरतलब है कि प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान कथित यौन शोषण के आरोप में वहां की पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इसी सिलसिले में प्रयागराज पुलिस के वाराणसी पहुंचने की चर्चाओं ने सोमवार सुबह से ही श्रीमठ परिसर में हलचल तेज कर दी। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रयागराज पुलिस के आने की सूचना है, लेकिन अभी तक वह वाराणसी नहीं पहुंची है।

शंकराचार्य ने कहा कि माघ मेले में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे थे। यदि उन फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी। “कैमरे की जद में जो भी घटनाएं हुई होंगी, वह प्रकाश में आ जाएंगी,” उन्होंने कहा। गिरफ्तारी को लेकर उन्होंने दो टूक कहा कि “गिरफ्तारी का प्रश्न नहीं बनता, क्योंकि हम कहीं भाग नहीं रहे हैं। शिकायतकर्ता की ओर से इतने दिन बीत गए, हम यहीं मौजूद हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि साक्ष्य सुरक्षित रखने के नाम पर गिरफ्तारी होती है तो वह उसके लिए भी तैयार हैं, लेकिन समाज के सामने उन्हें दोषी सिद्ध करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने ‘कालनेमि’ शब्द का प्रयोग करते हुए प्रदेश सरकार पर परोक्ष निशाना साधा और इसे राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई करार दिया।

शंकराचार्य ने कहा कि पुलिस को यदि इस प्रकरण को निस्तारित करने में जितनी रुचि है, उतनी ही उन्हें भी है। उन्होंने दोहराया कि वह जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे और किसी प्रकार का विरोध नहीं करेंगे। मठ में पहुंचे अधिवक्ताओं के संबंध में उन्होंने कहा कि कुछ अधिवक्ता अपनी श्रद्धा और विश्वास के कारण उनसे मिलने आए हैं, इसे किसी अन्य रूप में न देखा जाए। मामले ने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की सच्चाई क्या रूप लेती है।

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