उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हालिया सिंगापुर दौरा केवल औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि विकास के नए विज़न का संकेत है। सिंगापुर जैसे छोटे लेकिन अत्याधुनिक देश से सीख लेकर उत्तर प्रदेश को तकनीक, कौशल और सतत विकास के पथ पर आगे बढ़ाने की कोशिश स्पष्ट दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री ने आईटीए कॉलेज सेंट्रल का निरीक्षण कर वहां लागू ‘जीरो वेस्ट मैनेजमेंट’ मॉडल का बारीकी से अध्ययन किया। यह मॉडल केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं, बल्कि संसाधनों के अधिकतम उपयोग, पुनर्चक्रण और ऊर्जा दक्षता की व्यापक अवधारणा है।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और घनी आबादी वाले राज्य के लिए यह मॉडल अत्यंत प्रासंगिक है। यदि शैक्षणिक संस्थानों और नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट पृथक्करण, ऊर्जा पुनर्चक्रण और जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकें अपनाई जाएं, तो स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण दोनों में क्रांतिकारी बदलाव संभव है।
सवाल यह है कि क्या हम केवल मॉडल की प्रशंसा तक सीमित रहेंगे या उसे जमीन पर उतारने की ठोस रणनीति भी बनाएंगे?
सिंगापुर की एयरक्राफ्ट मेंटीनेंस एवं मरम्मत (एमआरओ ) यूनिट का निरीक्षण यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर उच्च-तकनीकी क्षेत्रों की ओर देख रहा है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सिंगापुर का एविएशन हब के रूप में उभार बताता है कि तकनीकी दक्षता, प्रशिक्षित मानव संसाधन और पारदर्शी नीति किस प्रकार किसी देश को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर सकती है।
उत्तर प्रदेश में यदि एमआरओ हब स्थापित होता है, तो यह न केवल निवेश आकर्षित करेगा बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी सृजित करेगा। कुशल तकनीशियनों और इंजीनियरों की मांग बढ़ेगी, जिससे कौशल विकास को नया आयाम मिलेगा।
लखनऊ में 12,500 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित मेगा एआई सिटी का ऐलान निश्चित रूप से महत्वाकांक्षी है। डेटा सेंटर, स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेंटर, रिसर्च हब और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर—ये सभी तत्व उत्तर प्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था के केंद्र में स्थापित कर सकते हैं।
परंतु किसी भी मेगा परियोजना की सफलता केवल भूमि उपलब्धता से नहीं, बल्कि—पारदर्शी नीतिगत ढांचे,निवेशकों के विश्वास,
मजबूत बुनियादी ढांचे,
और दीर्घकालिक कार्यान्वयन क्षमता पर निर्भर करती है।
यदि राज्य सरकार ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ को प्रभावी बनाते हुए समयबद्ध स्वीकृतियां सुनिश्चित कर सके, तो वैश्विक निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तभी संभव है जब कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र के साथ-साथ डिजिटल और हाई-टेक सेक्टर में संतुलित वृद्धि हो। एआई, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और एविएशन जैसे क्षेत्रों में निवेश राज्य की आर्थिक संरचना को नई दिशा दे सकता है।
सिंगापुर दौरे से यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश अब ‘अनुकरण’ से आगे बढ़कर ‘नवाचार’ की दिशा में सोच रहा है। चुनौती यही है कि घोषणाओं को ठोस क्रियान्वयन में बदला जाए और विकास का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचे।
सिंगापुर से मिले अनुभव और निवेश संवाद उत्तर प्रदेश के लिए अवसर का द्वार खोलते हैं। जीरो वेस्ट से लेकर एआई सिटी तक, यह यात्रा केवल तकनीकी बदलाव की नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और वैश्विक दृष्टिकोण की भी परीक्षा है।
यदि नीति, पारदर्शिता और प्रतिबद्धता का संतुलन बना रहा, तो लखनऊ से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश तक विकास का नया अध्याय लिखा जा सकता है।
सिंगापुर से लखनऊ तक टेक्नोलॉजी, कौशल और सतत विकास का नया खाका


