
अनुपम दुबे पर प्रशासनिक सख्ती के बीच ‘एम हाउस/केएम इंडिया’ को लेकर ब्राह्मण समाज में आक्रोश
फर्रुखाबाद। माफिया के रूप में चर्चित अनुपम दुबे पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई और ठंडी सड़क स्थित कथित सरकारी भूमि पर बने होटल ‘गुरु शरणम्’ के ध्वस्तीकरण के बाद शहर में नई बहस छिड़ गई है। जहां एक ओर प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण समाज के कुछ संगठनों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई “चयनात्मक” रही है।
प्रशासन ने हाल ही में ठंडी सड़क क्षेत्र में स्थित होटल ‘गुरु शरणम्’ को अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्त किया। अधिकारियों का कहना है कि यह निर्माण सरकारी जमीन पर किया गया था और नियमों के विपरीत था। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और बुलडोजर चलाकर ढांचे को गिराया गया।
लेकिन इसी क्षेत्र में स्थित कथित रूप से अवैध नंबर पर खड़े ‘केएम इंडिया’ से जुड़े ‘एम हाउस’ को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि यदि एक निर्माण अवैध था तो दूसरे की जांच और कार्रवाई क्यों लंबित है?
ब्राह्मण समाज के कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने एक पक्ष पर कठोर कार्रवाई की, लेकिन दूसरे निर्माण पर समान सख्ती नहीं दिखाई। उनका कहना है कि यदि निष्पक्षता का सिद्धांत लागू किया जाए तो सभी अवैध निर्माणों पर एक समान कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि प्रशासन की ओर से अभी तक ‘एम हाउस’ को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है।
कानून का मूल सिद्धांत है—समानता। यदि किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है, तो नियमों के तहत जांच और कार्रवाई होनी चाहिए।
यहां दो बड़े सवाल उभरते हैं,
क्या सभी कथित अवैध निर्माणों की समान रूप से जांच हो रही है?
क्या किसी स्तर पर फाइलों को लंबित रखकर निर्णय टाले जा रहे हैं?
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि भूमि अभिलेख, स्वामित्व दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड की जांच प्रक्रिया समय लेती है। जब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आती, तब तक कार्रवाई संभव नहीं होती।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
ऐसे मामलों में अक्सर राजनीतिक और सामाजिक आयाम जुड़ जाते हैं। एक ओर सरकार की “माफिया मुक्त” नीति का संदेश है, दूसरी ओर समाज के विभिन्न वर्गों में निष्पक्षता को लेकर आशंका भी। यदि कार्रवाई पारदर्शी और तथ्याधारित हो, तो विवाद की गुंजाइश कम होती है।
अनुपम दुबे के होटल ‘गुरु शरणम्’ पर हुई कार्रवाई ने यह संदेश जरूर दिया कि अवैध कब्जों पर सख्ती हो सकती है। लेकिन प्रशासन की विश्वसनीयता तभी मजबूत होगी जब हर मामले में समान और निष्पक्ष कदम उठाए जाएं।
शहर की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि ‘एम हाउस/केएम इंडिया’ प्रकरण में प्रशासन क्या रुख अपनाता है।कानून का राज तभी स्थापित होगा जब कार्रवाई व्यक्ति नहीं, बल्कि प्रमाण के आधार पर हो।


